मन की बात: पीएम मोदी ने कहा- ‘हुनर हाट में दिखी देश की परंपराएं और कला’ सुनाई ‘सलमान’ की कहानी

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम को संबोधित किया। आज मन की बात कार्यक्रम का 62वां अंक है। मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हुनर हाट, अंतरिक्ष और कॉप कन्वेंशन का जिक्र किया। यहां देखें मन की बात कार्यक्रम के मुख्य बिंदु-


हुनर हाट की तारीफ की

कुछ दिनों पहले, मैंने दिल्ली के हुनर हाट में एक छोटी-सी जगह में हमारे देश की विशालता, संस्कृति, परम्पराओं, खानपान और जज्बातों की विविधताओं के दर्शन किए। हुनर हाट में भाग लेने वाले कारीगरों में पचास प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। पिछले तीन वर्षों में हुनर हाट के माध्यम से तीन लाख कारीगरों, शिल्पकारों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। हुनर हाट कला के प्रदर्शन के लिए बेहतरीन मंच है। यह मंच लोगों के सपनों को पंख दे रहा है। यहां देश की विविधता को अनदेखा करना असंभव है। शिल्पकला तो है ही, साथ ही हमारे खाने-पीने की विविधता भी है।

युवाओं को किया संबोधित

इन दिनों हमारे देश के बच्चों और युवाओं में साइंस और टेक्नोलॉजी के प्रति रूचि लगातार बढ़ रही है। अंतरिक्ष में रिकॉर्ड सैटेलाइट का प्रक्षेपण, नए-नए रिकॉर्ड, नए-नए मिशन हर भारतीय को गर्व से भर देते हैं। बच्चों के, युवाओं के उत्साह को बढ़ाने के लिए उनमें साइंटिफिक टैंपर को बढ़ाने के लिए एक और व्यवस्था शुरु की गई है। अब आप श्रीहरिकोटा से होने वाले रॉकेट लॉंचिंग को सामने बैठकर देख सकते हैं।हाल ही में इसे सबके लिए खोल दिया गया है।

जिंदगी में होना चाहिए एडवेंचर

आने वाले महीने तो एडवेंटर स्पोर्ट्स के लिए बहुत उपयुक्त हैं। भारत का भौगोलिक परिवेश ऐसा है, जो हमारे देश में एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए ढेरों अवसर प्रदान करता है। एक तरफ जहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ हैं तो दूसरी तरफ दूर-दूर तक फैला रेगिस्तान है। जहां घने जंगलों का बसेरा है, वहीं समुद्र का असीम विस्तार है। इसलिए मेरा आप सबसे विशेष आग्रह है कि आप भी अपनी पसंदीदा जगह, अपनी रुचि की एक्टिविटी चुनें, अपने जीवन को एडवेंचर के साथ जरूर जोड़ें, जिंदगी में एडवेंचर तो होना ही चाहिए न।

प्रवासी पक्षियों का जिक्र

भारत के वातावरण का आतिथ्य लेने के लिए दुनिया भर से अलग-अलग प्रजातियों के पक्षी भी हर साल यहां आते हैं, गर्व की बात है कि 3 सालों तक भारत COP convention की अध्यक्षता करेगा , इस अवसर को कैसे उपयोगी बनायें, इसके लिए आप अपने सुझाव जरुर भेजें।

सुनाई ‘सलमान’ की कहानी

हाल ही में मैने मीडिया में एक ऐसी कहानी पढ़ी जिसे में आपसे जरूर साझा करना चाहता हूं। ये कहानी मुरादाबाद के हमीरपुर गांव में रहने वाले सलमान की। सलमान जन्म से ही दिव्यांग हैं। उनके पैर, उनका साथ नहीं देते हैं। इस कठिनाई के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी, खुद ही अपना काम शुरू करने का फैसला किया। साथ ही ये भी निश्चय किया कि अब वो अपने जैसे दिव्यांग साथियों की मदद करेंगे। फिर क्या था, सलमान ने अपने गांव में चप्पल और डिटर्जेंट बनाने का काम शुरू कर दिया। देखते ही देखते उनके साथ 30 दिव्यांग साथी जुड़ गए। आप भी ये गौर करिए कि सलमान खुद से चलने में दिक्कत थी लेकिन उन्होंने दूसरों का चलना आसान करने वाली चप्पल बना दी। सलमान ने सभी दिव्यांगों को ट्रेनिंग दी। सलमान ने 100 और दिव्यांगों को रोजगार देने का संकल्प लिया है।

सुनाई पूर्णिया की महिलाओं की कहानी

बिहार के पूर्णिया की कहानी देश के लोगों को प्रेरणा से भर देने वाली है। विषम परिस्थितियों में पूर्णिया की कुछ महिलाओं ने एक अलग रास्ता चुना। पहले इस इलाके की महिलाएं, शहतूत या मलबरी के पेड़ पर रेशम के कीड़ों से कोकून तैयार करती थीं। जिसका उन्हें बहुत मामूली दाम मिलता था। आज पूर्णिया की महिलाओं ने एक नई शुरुआत की और पूरी तस्वीर ही बदल कर के रख दी। इन महिलाओं ने सरकार के सहयोग से मलबरी-उत्पादन समूह बनाए। इसके बाद उन्होंने कोकून से रेशम के धागे तैयार किये फिर उन धागों से खुद ही साड़ियां बनवाना शुरू कर दिया जो अब हजारों रुपयों में बिक रही हैं।

105 वर्षीय भागीरथी अम्मा की कहानी

अगर हम जीवन में प्रगति करना चाहते हैं, विकास करना चाहते हैं, कुछ कर गुजरना चाहते हैं तो पहली शर्त यही होती है, कि हमारे भीतर का विद्यार्थी कभी मरना नहीं चाहिए। हमारी 105 वर्ष की भागीरथी अम्मा, हमें यही प्रेरणा देती है। 10 साल से कम उम्र में उन्हें अपना स्कूल छोड़ना पड़ा था।105 साल की उम्र में उन्होंने फिर स्कूल शुरू किया, पढाई शुरू की। इतनी उम्र होने के बावजूद उन्होंने level-4 की परीक्षा दी और 75% अंक प्राप्त किए।

12 साल की काम्या कार्तिकेयन का जिक्र

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश की महिलाओं, हमारी बेटियों की उद्यमशीलता, उनका साहस , हर किसी के लिए गर्व की बात है। अपने आस पास हमें अनेकों ऐसे उदाहरण मिलते हैं। जिनसे पता चलता है कि बेटियां किस तरह पुरानी बंदिशों को तोड़ रही है। नई ऊंचाई प्राप्त कर रही हैं। मैं आपके साथ 12 वर्ष की बेटी काम्या कार्तिकेयन की उपलब्धि की चर्चा जरूर करना चाहूंगा। काम्या ने सिर्फ 12 साल की उम्र में माउंट एकॉनकागुआ को फतह करने का कारनामा कर दिखाया। ये दक्षिण अमेरिका में ANDES पर्वत की सबसे ऊंची चोटी है। जो करीब 7,000 मीटर ऊंची है।

अब रॉकेट लॉन्चिंग कोई भी देख सकता है

इन दिनों युवाओं में वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ रही है। चंद्रयान-2 मिशन के तहत यह उत्साह मैंने बच्चों के बीच देखा था। अब आप श्रीहरिकोटा में रॉकेट लॉन्चिंग को आसानी से देख सकते हैं। इसके लिए विजिटर गैलरी बनाई गई है। सभी स्कूलों के प्राचार्यों से आग्रह करता हूं कि वे बच्चों को एक बार श्रीहरिकोटा में लॉन्चिंग जरूर दिखाएं। युविका की वेबसाइट www.yuvika.isro.gov।in पर जाकर कोई भी रजिस्ट्रेशन करा सकता है। यहां जाकर इसरो के कामकाज को करीब से देख सकता है।

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