पीएम मोदी ने 9 करोड़ से ज्यादा किसानों के खातों में ट्रांसफर की सम्मान निधि, संबोधन में कही ये खास बातें

चैतन्य भारत न्यूज

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर देश के नौ करोड़ किसानों के खाते में 18 हजार करोड़ की सम्मान निधि हस्तांतरित की। अटल जयंती के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में बीजेपी की 2500 किसान चौपाल हो रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश के गगन पेरिंग से संवाद किया। गगन ने पीएम को बताया कि उन्होंने अपने पैसों का इस्तेमाल ऑर्गेनिक फार्मिंग में किया और मजदूरों को पैसा दिया। पीएम मोदी ने गगन से पूछा कि क्या कंपनी सिर्फ आपकी अदरक ले जाती है या जमीन ही ले जाते हैं। पीएम मोदी ने इसके अलावा ओडिशा के एक किसान से चर्चा की, पीएम मोदी ने इस दौरान किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर उनसे बात की और उसके फायदे पूछे। पीएम मोदी ने कहा कि अटल जी की सरकार ने किसानों को सस्ते में कर्ज देने की शुरुआत की थी, हम उसे आगे बढ़ा रहे हैं।

हरियाणा के किसान हरि सिंह ने पीएम मोदी से संवाद किया। हरि सिंह ने बताया कि पहले वो धान की खेती करते थे, अब बागवानी करते हैं। महाराष्ट्र के किसान गणेश से पीएम मोदी ने संवाद किया। PM मोदी ने किसान से खेती और पशुपालन के अनुभवों को पूछा।

पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान ओडिशा के एक किसान नवीन ने कहा कि मैंने 2019 में अपना किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त किया,मैंने बिचौलियों से 20 प्रतिशत की तुलना में मात्र 4 प्रतिशत ब्याज पर बैंक से ऋण पर 27,000 रुपये की राशि ली। उन्होंने आगे कहा कि, ‘पीएम मोदी ने ओडिशा के एक किसान से कहा कि मैं आपसे किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड और इसके विभिन्न लाभों के बारे में बताने का आग्रह करता हूं, जिसमें कम ब्याज दर पर ऋण की उपलब्धता शामिल है।’

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यक्रम में कहा कि सिर्फ दो घंटों ही में नौ करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ भेजा जाएगा जो उनके सीधे बैंक खाते में जाएगा। कृषि मंत्री बोले कि देश में पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। बंगाल में करीब 70 लाख किसान हैं, जिन्हें 4200 करोड़ रुपये का पैसा ट्रांसफर होना है लेकिन बंगाल सरकार ने कोई निर्णय ही नहीं लिया है। पंजाब समेत कुछ अन्य राज्यों के किसानों को कृषि कानूनों को लेकर भ्रम पैदा हुआ है। वे अपना आंदोलन त्याग कर सरकार से बात करें, हम हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार हैं।

 

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