बिजली से संबंधित सभी समस्याओं के समाधान के लिए हर राज्य में होती है त्रिस्तरीय व्यवस्था

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चैतन्य भारत न्यूज

गर्मी व बारिश के मौसम में बार-बार बिजली का जाना या ऐसी ही बिजली से संबंधित और भी कई समस्याओं का बिजली उपभोक्ता के तौर पर हमें सामना करना पड़ता है। बिजली से संबंधित इन शिकायतों को लेकर कई बार अफसरों के इतने चक्कर काटने पड़ते हैं कि कुछ ही दिन में व्यक्ति हार मान लेता है। इसकी वजह है कि उपभोक्ता को यह पता ही नहीं होता है कि उसकी शिकायत का समाधान कहां से होगा। सच तो यह है, सभी राज्यों में बिजली से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था है। इसके अलावा उपभोक्ता फोरम और न्यायालय अलग से है।

बता दें न्यायालयों ने बिजली कंपनियों की मनमानी को रोकने के लिए उपभोक्ताओं के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने तो बिजली न देने को मानवाधिकार का उल्लंघन तक करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक फैसले में साफ कह दिया है कि, अगर कोई व्यक्ति किसी परिसर या भवन को खरीदता है तो वह पिछले मालिक का बिजली बिल देने के लिए जिम्मेदार नहीं है। बिजली नियामक आयोगों की मनमानी रोकने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि, आयोग में उपभोक्ता संगठनों का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए। बता दें बिजली की दरें नियामक आयोग तय करता है।

बिजली उपभोक्ताओं की आम दिक्कतें

बिजली काट देना, नया कलेक्शन लेना, गलत और बढ़ा हुआ बिल, खराब मीटर और उसे न बदलना, समय पर फॉल्ट रिपेयर न होना, वोल्टेज कम-ज्यादा होना, कनेक्शन के ट्रांसफर में देरी, एडवांस का रिफंड न होना यह सभी एक सामान्य उपभोक्ता के सामने आने वाली मुख्य दिक्कते हैं। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के मुताबिक, हर राज्य को उपभोक्ता की शिकायतों के निवारण के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाना जरुरी है। अगर आपकी समस्या का समाधान पहले स्तर पर नहीं हो तो आप दूसरे व तीसरे स्तर पर जा सकते हैं। इसके अंतर्गत बिजली चोरी, मीटर में टेंपरिंग व दुर्घटना जैसे मामले नहीं आते हैं।

बता दें हर राज्य में एक बिजली लोकपाल भी होता है। अगर आपकी समस्या का समाधान त्रिस्तरीय व्यवस्था में नहीं होता है तो आप लोकपाल के समक्ष अपनी शिकायत रख सकते हैं। अगर आपको यहां भी समस्या का हल नहीं मिला तो आपके पास उपभोक्ता फोरम में जाने का विकल्प है। इसके तहत आपको अपनी समस्या के निवारण के लिए एक निर्धारित फॉर्म भरना होता है। इस फॉर्म के जरिए पहले चरण में इलाके के एरिया ऑफिसर के पास शिकायत दर्ज करानी होती है।

यदि यहां पर भी आपकी समस्या हल नहीं हुई तो दूसरे चरण में आपको नोडल ऑफिसर के पास निर्दिष्ट फॉर्म पर शिकायत करना होगा। इसके अलावा आपको यहां पहले की शिकायत का ब्योरा भी देना होगा। अगर आपको यहां पर भी राहत न मिले तो फिर आप बिजली विभाग के उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम में शिकायत करें। इस फोरम में भी आपको पहले की पूरी कार्यवाही का ब्योरा देना पड़ता है। इस जगह भी अगर आपकी शिकायत का समाधान नहीं हुआ तो आपके पास बिजली लोकपाल के समक्ष अपील करने का विकल्प रहता है। यहां पर भी हल न मिलने पर आप जिला उपभोक्ता फोरम या न्यायालय में जा सकते हैं

बिजली से जुड़े कुछ प्रमुख फैसले

दिल्ली : गलत वजह से उपभोक्ता को लंबे समय तक बिजली का बिल न देने पर उपभोक्ता फोरम ने बीएसईएस राजधानी को उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश दिया।

मुंबई : द बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (बीईएसटी) की सेवा से नाराज उपभोक्ता ने टाटा पावर से बिजली के लिए आवेदन किया, लेकिन बीईएसटी ने एनओसी जारी नहीं की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीईएसटी के सभी तर्क खारिज किए और कहा कि उपभोक्ता को अधिकार है कि वह अपनी मर्जी का सेवा प्रदाता चुने।

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर बिजली चोरी समेत किसी भी वजह से किसी परिसर का मीटर निकाल लिया गया हो तो भी आप उपभोक्ता की बिजली नहीं काट सकते हैं।

 

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