दलित नेता शक्ति मलिक की हत्या के मामले में तेजस्वी-तेजप्रताप यादव के खिलाफ FIR दर्ज, पत्नी ने की फांसी की सजा देने की मांग

चैतन्य भारत न्यूज

लालू यादव के दोनों बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दोनों भाई समेत 6 लोगों के खिलाफ उनकी ही पार्टी के पूर्व नेता की हत्या मामले में FIR दर्ज की गई है। उसके बाद दोनों भाइयों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक सकती है। इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

महादलित समाज से आने वाले 37 साल के शक्ति मलिक की पूर्णिया जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। तेजस्वी और तेज प्रताप के अलावा आरजेडी दलित सेल के अध्यक्ष अनिल कुमार साधू, अररिया जिले के पार्टी नेता कालू पासवान, सुनीता देवी और एक अन्य व्यक्ति का भी नाम एफआईआर में है। मलिक की पत्नी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उनके पति की हत्या राजनीतिक कारणों की वजह से हुई है।

वीडियो हुआ था वायरल

शक्ति का एक वीडियो भी सामने आया जिसमें उन्होंने तेजस्वी यादव पर 50 लाख रुपए मांगने और पैसे देने से इंकार करने पर हत्या की धमकी देने का आरोप लगाया है। शक्ति ने कुछ दिन पहले ही एक वीडियो जारी कर कहा था कि, टिकट के लिए उनसे चंदा मांगा गया था। तेजस्वी ने मुझसे कहा था कि चंदा तो आपको देना ही पड़ेगा। तेजस्वी ने कहा था कि अगर तुम्हारे पास पैसा है तो टिकट लेकर चुनाव लड़ो, वरना यहां से निकलो। अगर तुम आवाज उठाने का काम करोगे तो तुम्हें जान से मरवा दिया जाएगा।’

इस वीडियो के वायरल होने के बाद आरजेडी ने मलिक को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। मलिक आरजेडी के दलित सेल की बिहार इकाई के सचिव पद पर थे। मलिक ने आरोप लगाया था कि तेजस्वी यादव ने चंदे के रूप में 50 लाख रुपए मांगे थे। मलिक रानीगंज सीट से चुनाव मैदान में उतरना चाहते थे। मलिक की पत्नी ने कहा है कि तीन लोगों ने उनके घर में घुस कर उनके पति को गोली मार दी और भाग गए।

इसी बीचशक्ति मलिक की पत्नी खुशबू मलिक भावुक हो गई और कहा कि, मेरे मांग का सिंदूर मिटाने वालों को कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए। मैं चाहती हूं कि मेरे पति के गुनाहगारों को फांसी की सजा हो।

आरजेडी ने बताया साजिश

आरजेडी के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि बिहार की जनता इस बार के विधानसभा चुनाव में साजिश करने वालों को माकूल जवाब देगी। तेजस्वी यादव की लोकप्रियता को देख जेडीयू नेताओं की बेचैनी बढ़ गयी है। आरजेडी की छवि को प्रभावित करने के लिए जेडीयू के द्वारा तरह-तरह की साजिश और दुष्प्रचार का सहारा लिया जा रहा है। दलित और अति पिछड़ों के सवाल पर आरजेडी को किसी से सर्टिफिकेट लेने की आवश्यकता नहीं है। बिहार की जनता देख चुकी है कि किस प्रकार एक दलित को मुख्यमंत्री पद से हटाने की साजिश रची गयी थी।

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