यहां है पुष्य नक्षत्र का 700 साल पुराना मंदिर, भगवान शिव और शनिदेव की एक साथ होती है आराधना

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चैतन्य भारत न्यूज

दीपावली के पहले खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र सबसे अच्छा माना जाता है। इस संयोग में जो भी खरीदी की जाएगी, वह शुभ रहेगी। पुष्य नक्षत्र के दिन सोना, चांदी, वाहन, घर एवं दुकान खरीदना शुभ माना जाता है। आज हम आपको पुष्य नक्षत्र के मंदिर के बारे में बताएंगे जो दुनिया भर में मशहूर है।



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700 साल पुराना है मंदिर 

भारत में तमिलनाडु के पेरावोरानी के निकट तंजावूर के विलनकुलम में अक्षयपुरीश्वर मंदिर है जो पुष्य नक्षत्र से संबंधित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। ये मंदिर तमिल वास्तुकला के अनुसार बना है। माना जाता है कि ये मंदिर करीब 700 साल पुराना है। इस मंदिर के पीठासीन देवता शिव हैं। उन्हें श्री अक्षयपूर्वीश्वर कहा जाता है।

अक्षयपुरीश्वर मंदिर की विशेषता

यहां शनिदेव की पूजा का बहुत महत्व है। इस मंदिर में वे अपनी पत्नियों मंदा और ज्येष्ठा के साथ हैं। पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग यहां पुष्य नक्षत्र, शनिवार या अक्षय तृतीया पर आकर शनिदेव की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, शनिदेव अंक 8 के स्वामी हैं इसलिए यहां 8 बार 8 वस्तुओं के साथ पूजा करके बांए से दाई ओर 8 बार परिक्रमा भी की जाती है।

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शिव-शनि के अलावा भी अन्य देवता

भगवान अक्षयपुरिश्वर यानी शिवजी के अलावा यहां भगवान गणेश, भगवान नंदिकेश्वर की भी मूर्ति हैं। यहां मां दुर्गा और देवी गजलक्ष्मी भी विराजित हैं। साथ ही यहां भगवान सूर्य और भैरव देवता की भी मूर्ति हैं। इसके अलावा भगवान सुब्रमण्य अपनी पत्नी देवी श्री वल्ली और दिव्यनै के साथ विराजित हैं। यहां नन्दी, भगवान दक्षिणामूर्ति, ब्रह्मा और भगवान नटराज की भी मूर्तियां हैं।

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पुष्य नक्षत्र का महत्व 

भगवान शनि पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं और शनिदेव के गुरु भगवान शिव हैं। इसलिए इस मंदिर में पुष्य नक्षत्र पर अच्छी सेहत, विवाह, सुख और समृद्धि के लिए शनिदेव के साथ उनके गुरु भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहां पुष्य नक्षत्र के संयोग पर शनि की महादशा और साढ़ेसाती से पीड़ित लोग पूजा करें तो उन्हें परेशानियों से राहत मिलती है।

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