भगवान जगन्नाथ को भी हर वर्ष 14 दिन के लिए किया जाता है क्वारेंटाइन, आज से नहीं बल्कि सदियों से है क्वारेंटाइन प्रथा

चैतन्य भारत न्यूज

दुनियाभर में कोरोना वायरस से अब तक 1 लाख 8 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और करीब 27 हजार लोग इसके संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। भारत की ही बात करें तो यहां कोरोना से 21 हजार 390 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और करीब 680 लोगों की जान चली गई है। ऐसे में दुनिया क्वारेंटाइन यानी कुछ समय के लिए सबसे अलग रहने का तरीका अपना रही है जिससे कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण को रोका जाए।

सदियों से अपनाया जा रहा क्वारेंटाइन का तरीका

बता दें क्वारेंटाइन शब्द इटली के क्वारंटा जिओनी से बना है। इसका अर्थ है 40 दिन का। दरअसल करीब 600 साल पहले दुनियाभर में प्लेग महामारी फैली थी जिससे बचने के लिए इतनी ने इस शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया था। खास बात तो यह है कि भारत में सदियों से क्वारेंटाइन का तरीका अपनाया जा रहा है। जन्म के बाद नवजात और मां को 10 दिनों तक अलग रखना, किसी की मृत्यु हो जाने पर दूरियां बना लेना आदि प्रथाएं क्वारेंटाइन का ही तो रूप है।

पौधों तक के लिए बनी है क्वारेंटाइन पॉलिसी

हमारे देश में तो पेड़-पौधों के लिए भी क्वारेंटाइन पॉलिसी बनाई गई है। इस पॉलिसी का उद्देश्य पर्याप्त नीतिगत और वैधानिक उपायों के जरिए महत्वपूर्ण पेड़-पौधों और पादप उत्पादों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और बीमारियों का रोकथाम करना है। इस नीति को प्लांट प्रोटेक्शन, क्वारेंटाइन एंड स्टोरेज डायरेक्टोरेट की देखरेख में लागू किया जाता है। यह विभाग कृषि मंत्रालय के तहत काम करता है।

जड़ी-बूटी से भगवान जगन्नाथ की सेवा

हर साल ओडिशा के पूरी में भगवान जगन्नाथ 14 दिनों तक अलग रहते हैं। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, ज्येष्ठ पूर्णिमा से अमावस्या तक भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं। इस दौरान उन्हें अलग रखकर सिर्फ जड़ी-बूटियों का पानी दिया जाता है।

बौद्ध: 8वीं सदी से है मान्यता

8वीं सदी में बोधायन और गौतम सूत्र में नवजात-माता और मृत व्यक्ति के रिश्तेदारों को संक्रमण से बचने के लिए कम से कम 10 दिन अलग रहने की बात कही गई है।

इस्लामिक वर्ल्ड

उमय्यद खलीफा अल वालिद प्रथम ने 706 ईस्वी में दमिश्क में कुष्ठ रोग पीड़ितों को अन्य लोगों से अलग रखा था। 1431 में ज्यादातर देशों ने इन पर अनिवार्य क्वारेंटाइन लागू किया।

बाइबिल

सातवीं सदी या शायद उससे पहले लिखी गई लेविटस की बाइबिल में भी किसी भी बीमारी के संक्रमण से बचने के लिए अलग रहने का उल्लेख किया गया है। इसकी प्रक्रिया मोजेक कानून के तहत बताई गई है।

ये भी पढ़े…

आखिर क्यों हर साल बीमार हो जाते हैं भगवान जगन्नाथ, यह चमत्कारी काढ़ा कर देता है उन्हें स्वस्थ

वाराणसी में लोगों के साथ भगवान भी प्रदूषण की चपेट में, मूर्तियों को पहना दिए मास्क

जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान सोने की झाड़ू से की जाती है रास्ते की सफाई

Related posts