पेंशन के खातिर रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी के बेटे ने कराया लिंग परिवर्तन!

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. रेलवे के सामने एक अजीबोगरीब मामला आया है जिसके कारण विभाग दुविधा में है। रेलवे ने केंद्र सरकार को एक पत्र भेजा है। यह पत्र 32 साल के एक ऐसे शख्स द्वारा लिखा गया है जो लिंग परिवर्तन करवाकर महिला बन चुका है। अब यह महिला रेलवे से फैमिली पेंशन की मांग कर रही है।

महिला के पिता रिटायर्ड रेलवे कर्मी थे। उनका निधन 2017 में हो गया है। अधिकारियों ने कहा कि, साल 2018 में यह पत्र चेन्नई स्थित दक्षिणी रेलवे के तहत एक डिवीजन को भेजा गया था। तब से रेलवे इस मामले को लेकर किसी तरह के नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। इसलिए पिछले सप्ताह रेलवे ने यह पत्र केंद्रीय कार्मिक, पेंशन, लोक शिकायत मंत्रालय और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को भेज दिया। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि, पेंशन कानून के मुताबिक, 25 साल से ज्यादा उम्र के बेटे पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र नहीं हैं। लेकिन कोई अविवाहित या तलाकशुदा आश्रित बेटी मृतक सरकारी कर्मचारी की पत्नी यानी अपनी मां की मृत्यु के बाद पेंशन के लिए पात्र है।

लिंग परिवर्तन कराने वाली महिला ने अपनी एक याचिका में यह दावा किया है कि, जब उसके पिता जिंदा थे वह तब से ही महिला का जीवन जी रही है। साथ ही अविवाहित भी है। इसलिए वह अविवाहित आश्रित बेटी के रूप में फैमिली पेंशन लेने की हकदार है। इस मामले में केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि, महिला के दस्तावेजों के अनुसार साल 2009 में उसे तमिलनाडु ट्रांसजेंडर वेलफेयर एसोसिएशन से एक सर्टिफिकेट मिला है। इस आधार पर उसे ट्रांसजेंडर श्रेणी में रखा जा सकता है। लेकिन पेंशन की नीतियों में औलाद के ट्रांसजेंडर होने जैसी कोई भी स्थिति शामिल नहीं है।

गौरतलब है कि यदि किसी रेलवे कर्मी की मृत्यु हो जाती है तो उसका बेटा न होने पर या फिर बेटे की उम्र 25 साल से कम होने पर वह पेंशन का हकदार होता है। या फिर किसी रेलकर्मी के परिवार में अगर सिर्फ बेटियां हों और उनकी शादी ना हुई हो तो वह परिवार रेलवे से फैमिली पेंशन मांग सकती है।

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