बच्चों की मौत: कोटा से भी बुरा बीकानेर का हाल, अहमदाबाद-राजकोट में 1 महीने में 196 नवजातों की मौत

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. राजस्थान में कोटा के जेके लोन सरकारी अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला अब तक नहीं थमा। यहां दिसंबर से अब तक 110 बच्चों की मौत हो गई है। इसी बीच गुजरात के राजकोट, अहमदाबाद और राजस्थान के बीकानेर से भी बच्चों मौत के मामले सामने आए हैं।


राजकोट में हुई 111 बच्चों की मौत

सूत्रों के मुताबिक, राजकोट के एक सरकारी अस्पताल में दिसंबर में 111 बच्चों की मौत हुई है। यहां बच्चों की मौत का कारण कुपोषण, जन्म से ही बीमारी, वक्त से पहले जन्म, मां का खुद कुपोषित होना बताया जा रहा है।

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अहमदाबाद में 85 बच्चों की मौत

अहमदाबाद सिविल अस्पताल में पिछले महीने यानी दिसंबर में 85 बच्चों की मौत हो गई। इस मामले में अहमदाबाद सिविल अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर गुणवंत राठौर ने कहा कि, ‘हर महीने 400 से ज्यादा बच्चे अस्पताल में दाखिल होते हैं, उस हिसाब से मृत्युदर 20 फीसदी जितना ही है। यहां सुविधाओं की कमी नहीं है, निजी अस्पतालों और बाकी सरकारी अस्पतालों से बच्चा क्रिटिकल कंडीशन में सरकारी अस्पताल भेजा जाता है। ऐसे में बच्चों की मौत पर आंकड़ा केवल सरकारी अस्पतालों में देखने को मिलता है।’

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बीकानेर में सबसे ज्यादा बच्चों की मौत

बीकानेर की बात करें तो यहां के सबसे बड़े पीबीएम शिशु अस्पताल ने तो बच्चों की मौत के मामले में कोटा और राजकोट को भी पीछे छोड़ दिया है। इस अस्पताल में दिसंबर के 31 दिनों में 162 बच्चों की मौत हुई। जानकारी के मुताबिक, दिसंबर में इस अस्पताल में जन्मे और बाहर से आए 2219 बच्चे पीबीएम शिशु अस्पताल में भर्ती हुए। इन्हीं में से 162 यानी 7.3 फीसदी बच्चों की मौत हो गई।

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कोटा में बच्चों की मौत का कारण ‘हाइपोथर्मिया’

गौरतलब है कि कोटा में लगातार बच्चों की हो रही मौतों के बाद यह मामला उजागर हुआ। जेके लोन अस्पताल में दिसंबर की शुरुआत से रविवार यानी आज तक 110 बच्चों की मौत हो गई है। जब इस मामले की जांच की गई तो विशेषज्ञों ने पाया कि हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान असंतुलित हो जाना) के कारण बच्चों की मौत हुई है। ऐसा अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण हो सकता है।

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