विजयाराजे सिंधिया के सम्मान में जारी हुआ स्मारक सिक्का, बहुत खास होता है यह सिक्का

चैतन्य भारत न्यूज

ग्वालियर. भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक सदस्य रहीं ग्वालियर राजघराने की राजमाता स्व. विजयाराजे सिंधिया के सम्मान में पीएम नरेंद्र मोदी ने स्मारक सिक्का जारी किया। 12 अक्टूबर को उनका जन्म शताब्दी वर्ष शुरू हुआ। नई दिल्ली में हुए वर्चुअल सम्मान में पीएम मोदी ने कहा कि राजमाता ने अपना जीवन गरीबों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि जनसेवा के लिए, राजकीय दायित्व के लिए खास परिवार में भी जन्म लेना जरूरी नहीं है। उनके पोते और राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि राजमाता की स्मृतियों को स्थायी बनाने के लिए यह सिक्का जारी किया गया है।

दरअसल, स्मारक सिक्का बहुत ही खास होता है और यह कभी प्रचलन में नहीं आता बल्कि इसका संग्रह किया जाता है। इस सिक्के पर मूल्य तो 100 रुपए अंकित है लेकिन यह करीब ढाई हजार रुपए में मिलेगा। कोलकाता की टकसाल में तैयार किए इस सिक्के का वजन करीब 35 ग्राम है।

कैसा है सिक्का

इसमें 50 फीसद चांदी और 50 फीसद अन्य धातुओं का मिश्रण है। इसकी गोलाई 44 मिलीमीटर है। इसके एक तरफ राष्ट्र का प्रतीक चिह्न अशोक स्तंभ व इसके नीचे सत्यमेव जयते अंकित है। हिंदी में भारत व रोमन में इंडिया अंकित है। दूसरी तरफ राजमाता का चित्र है। चित्र के गोलाकार में विजयाराजे सिंधिया के चित्र के नीचे जन्म वर्ष 1919 व जन्म शताब्दी वर्ष 2019 अंकित है। इसी के साथ सिंधिया घराना देश का पहला ऐसा राजपरिवार हो गया है जिसके सदस्य के सम्मान में स्मारक सिक्का जारी हुआ है। राजमाता की बड़ी बेटी वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं तो छोटी बेटी यशोधरा राजे मध्य प्रदेश में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके बेटे स्व. माधवराव सिंधिया पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे। उनके पोते ज्योतिरादित्य सिंधिया भी करीब छह माह पहले भाजपा सदस्य बन चुके हैं।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया का जन्म 12 अक्टूबर 1919 को मप्र के सागर में हुआ था। शादी से पहले उनका नाम लेखादेवीश्वरी था। 1941 में उनका विवाह ग्वालियर रियासत के महाराज जीवाजी राव सिंधिया के साथ हुआ। शादी के बाद उनका नाम विजयाराजे हुआ। राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने वर्ष 1957 में पहली बार पं. जवाहर लाल नेहरू के आग्रह पर चुनाव मध्यभारत से लड़ा और जीतकर संसद में पहुंचीं। 1991 तक आठ बार सांसद चुनी गईं। उनका निधन 25 जनवरी 2001 को हुआ था।

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