इस गांव में नेताओं के प्रचार पर लगा है बैन, फिर भी होती है 95-96% वोटिंग

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चैतन्य भारत न्यूज

चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक पार्टियां प्रचार-प्रसार के लिए निकल पड़ती हैं। देशभर के सभी बड़े शहरों से लेकर गांवों तक नेताओं की रैलियां और प्रचार का शोर होता ही रहता है। लेकिन हम आपको आज भारत के उस गांव के बारे में बता रहे हैं जहां पर कोई भी नेता प्रचार के लिए नहीं जाता है, लेकिन फिर भी हर चुनाव में इस गांव का 95 से 96 वोटिंग प्रतिशत रहता है। ये गांव है राजसमढियाल जो राजकोट जिले के अंतर्गत आता है।

प्रचार से माहौल खराब होने का डर

राजसमढियाल गांव का ये नियम है कि चुनाव के दौरान कोई भी नेता यहां प्रचार करने नहीं आ सकता है। गांव के लोगों का मानना है कि, नेताओं के प्रचार के कारण गांव का माहौल खराब होता है। इस गांव से चुनावी रैलियां और प्रचार का शोर कोसो दूर है। गांव के सरपंच अशोक भाई ने बताया कि, ‘जब हरदेव सिंह गांव के सरपंच बने थे तब से ही गांव में नेताओं के चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगा हुआ है।’ गांव में चुनाव-प्रचार पर बैन ना सिर्फ सरपंच ने लगाया बल्कि गांव वाले भी इसके समर्थन में हैं।

वोट ना डालने पर लगता है जुर्माना

इसके अलावा गांव की ये भी खास बात है कि, गांव का 18 साल से बड़ा हर शख्स वोट डालने जाता है। गांव में सभी को वोट डालना अनिवार्य किया गया है। खास बात तो ये है कि जो भी यहां वोट डालने नहीं जाता है उस पर 51 रुपए का जुर्माना भी लगाया जाता है। गांव वालों की हर बार ये कोशिश रहती है कि उनकी ओर से 100 प्रतिशत वोटिंग हो। इसके अलावा राजसमढियाल गांव को एक और खास वजह से जाना जाता है। जानकारी के मुताबिक, राजसमढियाल गुजरात का एक ऐसा आदर्श गांव है जिसके बारे में ये कहा जाता है कि यहां कोई भी अपने घर या दुकान में ताला नहीं लगाता है।

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