नए हथियार कानून को संसद से मिली मंजूरी, अब हर गोली पर होगी सरकार की नजर

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. बंदूकों का गलत इस्तेमाल करने वालों की अब खैर नहीं। अब से हर गोली पर नंबर होगा, जिसके जरिए यह पता चलेगा कि यह गोली किसकी है। मंगलवार को राज्यसभा में देश में आयुध हथियारों को रखने और उनके अवैध कारोबार को नियंत्रित करने से जुड़े विधेयक (Arms Amendment Bill) को मंजूरी मिल गई है। लोकसभा में यह विधेयक सोमवार को ही पारित कर दिया था।



केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी कृष्ण रेड्डी ने मंगलवार को राज्यसभा में हथियारों से संबंधित यह जानकारी दी। उन्होंने आयुध (संशोधन), विधेयक 2019 पर चर्चा के दौरान कहा कि, बहुत से सांसदों के परिवारों में चली आ रही हथियारों को रखने की परंपरा को सम्मान देते हुए पुश्तैनी हथियार रखने की अनुमति देने की मांग की थी। सरकार ने इसपर विचार कर निष्क्रीय किए जा चुके परंपरागत हथियार रखे जाने को आयुद्ध कानून-2016 के नियमों के अंतर्गत रखने की अनुमति प्रदान की है।

गोलियों की अवैध खरीद-बिक्री पर रोक लगाना संभव

उन्होंने बताया कि, गोलियों पर सीरियल नंबर के साथ ही सरकार नेशनल डाटाबेस ऑन आर्म्स लाइसेंस (एनडीएएल) और आर्म्स लाइसेंस इश्यूएंस सिस्टम (एएलआइएस) का पोर्टल भी लॉन्च करने की योजना बना रही है। इस पोर्टल पर एक ही जगह आर्म्स लाइसेंस जारी किए जाने, इसके धारकों और उपयोग की गई गोलियों की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। आने वाले समय में देश में न केवल हथियार बल्कि उनमें उपयोग होने वाली बुलेट को भी संख्या दी जाएगी। इससे किस लाइसेंस पर किस जगह से कौन सी बुलेट खरीदी गई इसका भी हिसाब रखा जा सकेगा। इस विधेयक के जरिए सरकार के पास इसकी पूरी जानकारी होगी कि किस नंबर की गोली किसके नाम पर जारी हुई है। ऐसे में गोलियों की अवैध खरीद-बिक्री पर रोक लगाना सरल हो जाएगा।

एक व्यक्ति रख सकेगा दो हथियार

रेड्डी के मुताबिक, ‘पहले एक व्यक्ति को तीन आयुध हथियार रखने की अनुमति थी। अब एक व्यक्ति की सिर्फ दो हथियार ही रखने की अनुमति होगी। उन्होंने आगे बताया कि, देशभर में लाइसेंसी हथियार रखने वालों में केवल 1 प्रतिशत के पास ही तीन हथियार हैं। इसमें समयानुकुल बदलाव किए गए हैं ताकि हथियारों के अवैध कारोबार पर नियंत्रण किया जाए। इसमें सजा के प्रावधानों को बढ़ाया गया है।’

नए कानून के मुताबिक सजा के प्रावधान-

  • प्रतिबंधित शस्त्र और प्रतिबंधित गोला बारूद रखने की अवस्था में 5 से 7 साल की जगह सात से 14 साल का कारावास हो सकता है।
  • सेना के जवानों या पुलिस बल से हथियार छिनने की स्थिति में आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
  • अवैध हथियार बनाने वालों, संगठित अपराध और सिंडिकेट को हथियार सप्लाई करने वालों के लिए भी आजीवन कारावास की सजा होगी।
  • ‘हर्ष फायरिंग’ (शादियों और खुशी के अवसर पर हवा में गोली चलाना) के दौरान होने वाली मौतों को लेकर भी कठोर सजा का प्रावधान है।
  • डकैती और चोरी से किए हथियारों को रखने वालों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है।
  • अवैध हथियार रखने वालों को 7 से 14 वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है।

ये बदलाव भी हुए

  • लाइसेंसधारी को हर तीन साल में लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करना होगा। अब इसकी सीमा बढ़कर पांच साल कर दी गई है।
  • नए कानून के मुताबिक, खिलाड़ियों, पूर्व सैनिकों व मौजूदा सैनिकों को मिलने वाले हथियारों के लाइसेंस में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
  • खिलाड़ियों की जरूरत को देखते हुए नए कानून में उन्हें और अधिक हथियार देने की व्यवस्था की गई है।
  • सैन्यबल के अवकाश प्राप्त अधिकारी की शस्त्र की पूर्व संख्या को भी उसी तरह रखा गया है।

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