25 मई को है रंभा तीज, सुहागिन महिलाएं इस दिन करती हैं अति सुंदरी अप्सरा रंभा की पूजा

rambha teej

चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रंभा तृतीया व्रत या कहें रंभा तीज व्रत किया जाता है। इस दिन को विशेष रूप से अप्सरा रंभा की पूजा की जाती है। इस बार रंभा तीज 25 मई को है।इस दिन विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र, बुद्धिमान संतान पाने के लिए यह व्रत रखती है। कुंआरी कन्याएं यह व्रत अच्छे वर की कामना से करती हैं।

रंभा तृतीया का महत्व

हिन्दू मान्यता के अनुसार सागर मंथन से उत्पन्न हुए 14 रत्नों में से एक रंभा भी थीं। रंभा बेहद सुंदर थीं। कई स्थानों पर विवाहित स्त्रियां चूड़ियों के जोड़े की पूजा करती हैं, जिसे रंभा (अप्सरा) और देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों की माने तो इस व्रत को रंभा ने सौभाग्य प्राप्ति के लिए किया था। इसी कारण रंभा को यह नाम मिला था।

सौलह श्रंगार करती है महिलाएं

इस व्रत में महिलाएं सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करती हैं। तीर्थ स्नान या पानी में गंगाजल मिलाकर नहाती हैं। इस दिन महिलाएं सौभाग्य प्राप्ति के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं और सोलह श्रंगार करती हैं। इस व्रत में मेहंदी लगाने का विशेष महत्व है। रंभा तीज के व्रत में महिलाएं सौभाग्य सामग्रियों यानी श्रंगार की चीजों का दान भी करती हैं। इसके अलावा इस व्रत में मिट्‌टी के बर्तन में जलभर कर दान करने का भी बहुत महत्व है। लक्ष्मीजी और देवी पार्वती की पूजा में सौभाग्य सामग्री अर्पित करती हैं। इस दिन मंदिर और घर पर ही शिव, पार्वती और गणेश जी की आराधना करके घर में बड़ों से आशीर्वाद लिया जाता हैं। घर की बड़ी महिला को श्रंगार की चीजें और मिठाई दी जाती है।

रंभा तृतीया पूजा विधि

  • सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
  • इसके बाद पूर्व दिशा में मुंहकर के पूजा के लिए बैठें।
  • भगवान शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित करें।
  • उनके आसपास पूजा में पांच दीपक लगाएं।
  • इसके बाद पहले गणेश जी की पूजा करें।
  • फिर इन 5 दीपक की पूजा करें।
  • इनके बाद भगवान शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए।
  • पूजा में देवी गौरी यानी पार्वती को कुमकुम, चंदन, हल्दी, मेहंदी, लाल फूल, अक्षत और अन्य पूजा की सामग्री चढ़ाएं।
  • भगवान शिव गणेश और अग्निदेव को अबीर, गुलाल, चंदन और अन्य सामग्री चढ़ाएं।
  • पूजा में ॐ महाकाल्यै नम:, ॐ महालक्ष्म्यै नम:, ॐ महासरस्वत्यै नम: आदि मंत्रों का जाप करें ।
  • मां लक्ष्मी की पूजा के बाद सुहागन स्त्रियों को श्रृंगार का दान अवश्य करें।

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