Ramadan 2021: अल्लाह की इबादत और रोजों का महीना रमजान, जानें क्यों पवित्र माना जाता है यह माह और इसका इतिहास

चैतन्य भारत न्यूज

इस्लाम धर्म में सबसे पवित्र महीना माना जाने वाला रमजान (Ramzan) जल्द ही दस्तक देने वाला है। रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग व्रत यानी रोजा रखकर शिद्दत से अल्लाह की इबादत करते हैं। रमजान के पूरे महीने (29 या 30 दिन) तक मुस्लिम समुदाय के लोग रोजे रखते हैं, कुरान पढ़ते हैं। 14 अप्रैल से रोजे (Roze) रखे जाएंगे। रमजान के महीने की शुरुआत चांद देख कर होती है। चांद देखने के अगले दिन से रोजे रखे जाते हैं। इस महीने को बरकतों का महीना माना जाता है। मुस्लिम समाज में इसकी बहुत अहमियत है। इस दौरान लोग पांचों वक्‍त की नमाज अदा करते हैं और कुरान मजीद की तिलावत करते हैं।

  • रमजान का चांद दिखाई देने के बाद सुबह को सूरज निकलने से पहले सहरी खाकर रोजा रखा जाता है, जबकि सूर्य ढलने के बाद इफ्तार होता है। जो लोग रोजा रखते हैं वो सहरी और इफ्तार के बीच कुछ भी नहीं खा-पी सकते।
  • इस्लामिक धर्म में 7 साल की उम्र के बाद से रोजे रखे जा सकते हैं।
  • हर दिन की नमाज के अलावा रमजान में रात के वक्त एक विशेष नमाज भी पढ़ी जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं। लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। हालांकि, इस बार कोरोना वायरस के चलते मस्जिदों में लोग एक साथ नमाज नहीं पढ़ सकेंगे।
  • मान्यताएं हैं कि रमजान के महीने में अल्लाह अपने बंदों को बेशुमार रहमतों से नवाजता है और दोजख (जहन्नुम) के दरवाजे बंद कर के जन्नत (स्वर्ग) के दरवाजे खोल देता है।
  • माना जाता है कि रमजान के महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर जायज दुआ को कुबूल करता है और उनको गुनाहों से बख्शीश (बरी) करता है।
  • रमजान का महीना इसलिए भी जरूरी होता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस महीने की गई इबादत का सवाब बाकी महीनों के मुकाबले 70 गुना मिलता है।
  • रमजान का महीना इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना होता है।
  • रमजान के महीने में अल्लाह की किताब ‘कुरान शरीफ’ नाजिल यानी जमीन पर उतरी थी। इसलिए रमजान के महीने में मुसलमान ज्यादातर अपना वक्त नमाज और कुरान पढ़ने में गुजारते हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि रमजान का महीना इंसान को खुद पर काबू करना सिखाता है।

आंख, जबान और कान का रोजा

रोजे रखने का मतलब सिर्फ खाने और पीने की चीजों से दूरी बनाना नहीं होता है बल्कि झूठ बोलने और गलत कार्यों से भी परहेज करना होता है। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों गलत देखने या सुनने से रोजे का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता। इसलिए कहा जाता है कि रोजा रखने पर इंसान हर गलत काम और बुराइयों से पाक हो जाता है।

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