RSS में बड़ा बदलाव, दत्तात्रेय होसबोले बने सरकार्यवाह, जानिए कैसे होता है सरकार्यवाह का चुनाव

चैतन्य भारत न्यूज

बेंगलुरू. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सर्वोच्च इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार से बेंगलुरु में शुरू हुई। इस बैठक में अहम फैसला हुआ। संघ में सरकार्यवाह (महासचिव) का चुनाव हो गया है, जिसमें सुरेश भैयाजी जोशी की जगह दत्तात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की जिम्मेदारी दी गई है। बता दें दत्तात्रेय होसबाले 2009 से सह सरकार्यवाह का दायित्व निर्वहन कर रहे थे।


यह चुनाव बेंगलुरु के चेन्नहल्ली स्थित जनसेवा विद्या केंद्र में चल रही प्रतिनिधि सभा में शनिवार (20 मार्च) को हुआ। बता दें आज इस बैठक का आखिरी दिन है। संघ की प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से अगले तीन साल के लिए दत्तात्रेय को सरकार्यवाह चुना है। उससे पहले वह सह सरकार्यवाह का दायित्व संभाल रहे थे। इससे पहले भैयाजी जोशी सरकार्यवाह की जिम्मेदारी निभा रहे थे। होसबाले न केवल 2024 के चुनावों तक बल्कि 2025 में संघ के स्थापना के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम के दौरान भी RSS के संगठनात्मक ढांचे को कंट्रोल करेंगे।

संघ में ऐसे होता है चुनाव

बता दें कि संघ में हर तीन साल बाद जिला संघचालक, विभाग संघचालक, प्रांत संघचालक और क्षेत्र संघचालक के साथ-साथ सरकार्यवाह का चुनाव होता है। हालांकि, आवश्यकतानुसार बीच में भी कुछ पदों पर बदलाव होता रहता है। क्षेत्र प्रचारक और प्रांत प्रचारकों के दायित्व में बदलाव भी प्रतिनिधि सभा की बैठक में होता है। संघ में प्रतिनिधि सभा निर्णय लेने वाला विभाग है।

कितना महत्वपूर्ण है सरकार्यवाह का पद?

यह समझने के लिए संघ की व्यवस्था को समझना होगा। संघ प्रमुख या सरसंघचालक के लिए चुनाव नहीं होते। संघ प्रमुख अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति करते हैं। केएस सुदर्शन ने ही मौजूदा सरसंघचालक मोहन भागवत की नियुक्ति की थी। पर संघ प्रमुख की भूमिका मुख्य तौर पर मार्गदर्शन की होती है। संगठन का सारा कामकाज सरकार्यवाह ही देखते हैं।

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