रंग पंचमी: कोरोना वायरस का कहर, इंदौर की परंपरागत गेर हुई निरस्त

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चैतन्य भारत न्यूज

इंदौर. जब कभी रंग पंचमी की बात की जाए और इंदौर के गेर का जिक्र न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। इंदौर में हर वर्ष रंग पंचमी पर रंगारंग गेर निकाली जाती है जिसमें लाखों की संख्या में लोग शामिल होते हैं।  लेकिन  इस साल  कोरोना वायरस  के चलते 14 मार्च को इंदौर में गेर निरस्त कर दी गई है।



गेर देखने आने वाली थी यूनेस्को की टीम

फागुनी मस्ती के माहौल में रंगपंचमी के अवसर पर इस बार खासतौर से यूनेस्को की टीम भी गेर देखने राजबाड़ा आने वाली थी। बता दें इंदौर की गेर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने यूनेस्को को नामांकन भेजा था। इंदौर के इस पारंपरिक आयोजन को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के तौर पर यूनेस्को की सूची में शामिल करने के लिए यह प्रयास किया जा रहा था।

छतों पर किया था सैलानियों को बैठाने का इंतजाम

इंदौर के कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव ने बताया था कि, ‘हम गेर को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में यूनेस्को की मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए नई दिल्ली की संगीत नाटक अकादमी के जरिए यूनेस्को को नामांकन भिजवाया गया।’ गेर के करीब 2 किलोमीटर के रास्ते पर दोनों ओर की बहुमंजिला इमारतों की छतों पर सैलानियों को बैठाने के इंतजाम किए गए थे ।

होलकर राजवंश की परंपरा गेर

बता दें इंदौर में गेर की परंपरा उस समय से शुरू हुई थी जब होलकर राजवंश के लोग रंगपंचमी के अवसर पर आम जनता के साथ होली खेलने के लिए सड़कों पर निकलते थे। उस समय गेर में बैलगाड़ियों का बड़ा काफिला होता था। उन पर टेसू के फूलों और अन्य हर्बल वस्तुओं से तैयार रंगों की कड़ाही रखी जाती थी। यह रंग गेर में शामिल होने वाले लोगों पर बड़ी-बड़ी पिचकारियों से बरसाया जाता था। इस परंपरा का मकसद समाज के हर तबके के लोगों को रंगों के इस त्योहार में शामिल करना होता है। राजे-रजवाड़ों का शासन खत्म होने के बावजूद इंदौर के लोगों ने इस परंपरा को जारी रखा।

ये समितियां निकालती हैं गेर

  • संगम कार्नर चल समारोह समिति : संगम कॉर्नर की परंपरागत सद्भावना गेर 64 साल से निकल रही है। इसमें पानी मिसाइल द्वारा 200 फीट ऊपर से बसराया जाता है।
  • टोरी काॅर्नर रंग पंचमी महोत्सव समिति : टोरी कॉर्नर की गेर पिछले 73 सालों ने निकल रही है। यात्रा टोरी कार्नर से शुरू होकर राजबाड़ा पहुंचेगी। स्वचलित मिसाइलों से 70 फीट की ऊंचाई तक रंग फेंका जाता है।
  • फाग यात्रा : हिंद रक्षक संगठन द्वारा रंगपंचमी पर राधाकृष्ण फाग यात्रा निकाली जाती है।
  • माधव फाग यात्रा : माधव फाग यात्रा पिछले 15 सालों से निकाली जा रही है। यह यात्रा जबरन कॉलोनी से शुरू होकर गाड़ी अड्‌डा, जवाहर मार्ग, पंढ़रीनाथ, हरसिद्धी पहुंचती है।

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