एक अनूठा ‘कल्पवृक्ष’, जिसमें हमारे शरीर में आवश्यक 8 अमीनो एसिड में से 6 पाए जाते हैं

kalpavriksha

चैतन्य भारत न्यूज

सागर. कल्पवृक्ष एक विशेष वृक्ष है। पौराणिक धर्म ग्रंथों और हिंदू मान्यताओं के अनुसार, माना जाता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर व्यक्ति जो भी इच्छा करता है, वह पूर्ण हो जाती है। यह दुर्लभ व पौराणिक कल्पवृक्ष मध्यप्रदेश के सागर में भी है। जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में मौजूद दो कल्पवृक्ष अतिक्रमण की जद में आ रहे थे, जिसके तहत उसे काटा जाना था। लेकिन अधिकारियों की सूझबूझ से इन दोनों वृक्षों को एक बार फिर जीवन मिल गया। अधिकारियों ने वृक्षों को ना काटकर निर्माणाधीन कार्यालय का नक्शा ही बदल दिया।



ये दोनों कल्पवृक्ष जिला मुख्यालय में बने ज्वाइंट कलेक्ट्रेट भवन में हैं। दोनों बरकरार रहे इसलिए जिला प्रशासन द्वारा भवन के नक्शे में कई बदलाव कर दिए गए। जानकारी के मुताबिक, जिले के तीन कलेक्टरों के निर्देशन में बने इस भवन की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई से निपटते हुए करीब 40 साल पुराना अतिक्रमण सख्ती से हटाया। लेकिन जब बात इन दोनों वृक्षों को हटाने की आई तो अधिकारियों ने भवन के पूर्व निर्धारित नक्शे और डिजाइन को ही बदल दिया।

शंकराचार्य भी आ चुके हैं दर्शन करने

जानकारी के मुताबिक, ज्वाइंट कलेक्ट्रेट भवन के निर्माण के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ यहां का उद्घाटन करेंगे। बता दें इस भवन की एक ही छत के नीचे कई विभाग होंगे। यह भवन करीब 15 करोड़ रुपए की लागत से 2700 वर्गमीटर में बना है। 1995-96 में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जब सागर आए थे और उन्हें यहां इन कल्पवृक्षों के होने की जानकारी हुई तो वह भी इनके दर्शन करने पहुंचे थे।

कहां-कहां हैं कल्पवृक्ष

दुनियाभर में कल्पवृक्ष केवल अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और भारत में ही पाया जाता है। भारत में रांची, मंदसौर, अल्मोड़ा, काशी, नर्मदा किनारे, कर्नाटक में कुछ स्थानों पर यह वृक्ष पाया जाता है। इस वृक्ष की आयु साढ़े चार हजार वर्ष से भी ज्यादा मानी गई है। इस वृक्ष की शाखाएं नीचे और जड़ें ऊपर की ओर होती है। इस वृक्ष का उल्लेख गीता में भी किया गया है। पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से कल्पवृक्ष भी एक था। इस वृक्ष को इंद्र देव को दिया गया था। फिर इंद्र देव ने इसकी स्थापना सुरकानन वन में की थी। शास्त्रों में कहा गया है कि, जो भी व्यक्ति इस वृक्ष के नीचे बैठकर सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी हर इच्छा पूरी हो जाती है।

ये हैं कल्पवृक्ष की खासियत

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, हमारे शरीर में आवश्यक 8 अमीनो एसिड में से 6 इस वृक्ष में पाए जाते हैं।
  • कल्पवृक्ष एक परोपकारी वृक्ष है, जिसमें संतरे से 6 गुना ज्यादा विटामिन ‘सी’ मिलता है और गाय के दूध से दोगुना कैल्शियम होता है।
  • कल्पवृक्ष की 3 से 5 पत्तियों का रोजाना सेवन करने से हमारे दैनिक पोषण की जरूरत पूरी हो जाती है। साथ ही इस वृक्ष की पत्तियां कब्ज और एसिडिटी में भी सबसे कारगर है।
  • कल्पवृक्ष के पत्तों में एलर्जी, दमा, मलेरिया को समाप्त करने की शक्ति होती है। गुर्दे के रोगियों के लिए भी इसकी पत्तियों व फूलों का रस लाभदायक है।
  • जहां भी कल्पवृक्ष अधिक संख्या में पाया जाता है, वहां सूखा नहीं पड़ता।
  • कल्पवृक्ष की यह भी खासियत है कि, यह अपने आस-पास कीट-पतंगों को फटकने तक नहीं देता है और दूर-दूर तक वायु के प्रदूषण को समाप्त कर देता है।

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