रतन टाटा ने कोरोना वायरस फैलने के लिए बिल्डरों को ठहराया जिम्मेदार, कहा- झुग्गियों में कोरोना संकट, शर्म आनी चाहिए…

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. प्रख्यात उद्योगपति और टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा ने डेवलपरों और आर्किटेक्टों के शहरों में मौजूद स्लम यानी झुग्गी-झोपड़ियों को ‘अवशेष’ की तरह इस्तेमाल करने पर नाराजगी जाहिर की है। रतन टाटा ने देश में फैले कोरोना वायरस की एक बड़ी वजह इन झुग्गी झोपड़ी कॉलोनियों को भी बताया।

बिल्डरों को शर्म आनी चाहिए: टाटा

रतन टाटा ने यह बात ग्लोबल इनोवेशन प्लेटफॉर्म कॉर्पजिनी के ‘भविष्य के डिजाइन और निर्माण’ विषय पर वर्चुअल पैनल डिस्कशन में कही। टाटा का कहना है कि, शहरों में स्लम बस्तियां उभर आने के लिए बिल्डरों को शर्म आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि, ‘कोरोना वायरस के कहर ने शहर में आवास के संकट को उजागर किया है। मुंबई के लाखों लोग ताजी हवा और खुली जगह से महरूम हैं। बिल्डरों ने ऐसे स्लम बना दिए हैं, जहां सफाई का इंतजाम नहीं है। हमें शर्म आनी चाहिए क्योंकि एक तरफ तो हम अपनी अच्छी छवि दिखाना चाहते हैं दूसरी और एक हिस्सा ऐसा है जिसे हम छिपाना चाहते हैं।’

बिल्डरों ने बना दिए वर्टिकल स्लम

टाटा ने कहा कि, ‘सस्ते आवास और झुग्गियों का उन्मूलन आश्चर्यजनक रूप से दो परस्पर विरोधी मुद्दे हैं। हम लोगों को अनुपयुक्त हालातों में रहने के लिए भेजकर झुग्गियों को हटाना चाहते हैं। यह जगह भी शहर से 20-30 मील दूर होती हैं और अपने स्थान से उखाड़ दिए गए उन लोगों के पास कोई काम भी नहीं होता है।’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘जहां कभी स्लम बस्ती होती थी वहां जब ऊंची कीमत वाली हाउसिंग यूनिट बनती हैं तो स्लम एक तरह से विकास के अवशेष में तब्दील हो जाती हैं। बिल्डरों और आर्किटेक्टों ने एक तरह से वर्टिकल स्लम बना दिए हैं, जहां न तो साफ हवा है, न साफ-सफाई की व्यवस्था और न ही खुला स्थान।’

नाकामियों पर भी शर्मिदा भी होना चाहिए

रतन टाटा ने कहा कि, ‘इस महामारी ने स्लम बस्ती द्वारा हर किसी के लिए खड़ी की जाने वाली समस्या को रेखांकित कर दिया है। अगर हमें अपनी उपलब्धियों पर गर्व होता है तो अपनी नाकामियों पर शर्मिदा भी होना चाहिए।’ बता दें देश में कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा संक्रमण महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में फैल रहा है। मुंबई के केंद्र में बसा स्लम एरिया धारावी भी कोरोना संकट से जूझ रहा है। जानकारी के मुताबिक, धारावी में अब तक 150 से ज्यादा कोरोना के मामले सामने आ चुके हैं और यह संख्या बढ़ सकती है।

रतन टाटा को इस बात का है मलाल

टाटा ने यह भी बताया कि उन्हें एक आर्किटेक्ट के तौर पर अपना काम लंबे समय तक जारी न रख पाने का भी मलाल है। उन्होंने बताया कि, उनके पिता उन्हें इंजिनियर बनाना चाहते थे। टाटा ने कहा, ‘मैं हमेशा से आर्किटेक्ट बनना चाहता था क्योंकि यह मानवता की गहरी भावना से जोड़ता है। मेरी उस क्षेत्र में बहुत रुचि थी क्योंकि वास्तुशिल्प से मुझे प्रेरणा मिलती है। लेकिन मेरे पिता मुझे एक इंजीनियर बनाना चाहते थे, इसलिए मैंने दो साल इंजीनियरिंग की। दो साल अमेरिका के लॉस एंजिल्स में इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बावजूद मैं आर्किटेक्ट नहीं बन सका, इसका पछतावा है। मुझे आर्किटेक्ट नहीं बन पाने का दुख कभी नहीं रहा, मलाल तो इस बात का है कि मैं ज्यादा समय तक उस काम को जारी नहीं रख सका।’

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