नियमित कसरत करने से शरीर बढ़ाता है अपनी क्षमताएं

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चैतन्य भारत न्यूज

वॉशिंगटन. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित कसरत की काफी अहम भूमिका होती है। अब इस बारे में एक और महत्वपूर्ण बात शोधकर्ताओं ने नए अध्ययन के आधार पर बताई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, लंबे समय तक नियमित रूप से कसरत या व्यायाम या वर्जिश करने से हमारा शरीर अपनी क्षमताओं का विस्तार करता है। साथ ही ऊर्जा की खपत भी समय के साथ कम होती जाती है। अमेरिका में आयोजित 20 सप्ताह की दौड़ के दौरान आवकों पर किए गए अध्ययन के आधार पर शोधकर्ता उपरोक्त निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।

यह ऐसा पहला अध्ययन है जिसमें मानव शरीर द्वारा रोजाना खर्च की जा सकने वाली ऊर्जा के उच्चतम स्तर को जानने का प्रयास किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि, इस अध्ययन के परिणामों को एथलीटों पर लागू किया जा सकता है। साथ ही इससे मानव विकास को समझने में मदद भी मिल सकती है।

पहले के अध्ययन में यह आया था सामने

हममें से ज्यादातर लोग मानते हैं कि आराम की स्थिति की तुलना में जब हम शरीरिक रूप से सक्रिय होते हैं तब अकि कैलोरी खर्च करते हैं। हम जितना कठोर और लंबे समय तक व्यायाम करते हैं उतनी ही ज्यादा कैलोरी की खपत होती है और यह असीम है। हालांकि, 2012 में किया गया एक अध्ययन बताता है कि इसकी एक सीमा है। अध्ययन में बताया गया था कि दिन भर सक्रिय रहने वाले आदिवासी भी रोजाना उतनी ही कैलोरी खर्च करते हैं, जितनी कि पूरा दिन डेस्क पर काम करने वाले।

इस तरह किया गया अध्ययन

2015 में शोधकर्ताओं द्वारा एक अध्ययन किया गया। रेस एक्रॉस यूएसए नामक एक प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को कैलिफोर्निया से वाशिंगटन डीसी तक दौड़ में शामिल होना था। रोजाना होने वाली यह मैराथन करीब 20 सप्ताह तक चलनी थी। वैज्ञानिकों के एक दल ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले आवकों से उनके मेटाबॉलिज्म की जांच करने को कहा। वैज्ञानिकों के इस दल में 2012 के अध्ययन में काम कर चुके कुछ वैज्ञानिक भी शामिल थे। वैज्ञानिकों के कहने पर छह प्रतिभागी तैयार हो गए। दौड़ की शुरुआत के एक सप्ताह पहले से उनके मेटाबॉलिज्म की जांच की जाने लगी। इसके बाद शोधकर्ताओं ने दौड़ के पहले सप्ताह और फिर आखिरी सप्ताह में आवकों के मेटाबॉलिज्म की जांच की। हालांकि, 20 सप्ताह की इस दौड़ के आखिरी सप्ताह में से छह में से तीन प्रतिभागी ही बचे थे।

यह आया सामने

शोधकर्ताओं के मुताबिक, आवकों में ऊर्जा की खपत में परिवर्तन बेहद चौंकाने वाला था। मैराथन के पहले सप्ताह में प्रतिभागी जहां रोजाना औसतन 6,200 कैलोरी खर्च कर रहे थे, वहीं आखिरी सप्ताह में 600 कैलोरी कम खर्च कर प्रतिभागी रोजाना उसी रफ्तार से और उतनी ही दूरी दौड़ रहे थे। हालांकि, 20 सप्ताह में आवकों का वजन कुछ कम हो गया था।

क्या कहना है शोधकर्ताओं का

ड्यूक यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर हरमन पॉटर कहते हैं कि, हमारा शरीर यह जानता है कि उसकी क्या सीमाएं हैं और उसे पार करने के लिए कितनी ऊर्जा की खपत और कितनी ऊर्जा को बचाने की जरूरत है। नियमित रूप से कड़ा व्यायाम करने से हमारा शरीर अपनी क्षमताओं का विस्तार करता है और ऊर्जा की खपत भी कम होती है।

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