रिलायंस AGM : जियो-गूगल ने मिलाया हाथ, बनाएंगे सस्ते एंड्रॉयड स्मार्टफोन, हुए ये बड़े ऐलान

चैतन्य भारत न्यूज

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Ltd, RIL) की 43वीं एनुअल मीटिंग में कंपनी के प्रमुख मुकेश अंबानी ने कई प्रमुख ऐलान किए हैं। इस दौरान उन्होंने बताया कि, अगले साल तक 5जी तकनीक लॉन्च की जा सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि, ‘गूगल और जिओ साथ मिलकर एक ऑपरेटिंग सिस्टम बनाएंगे, जो एंट्री लेवल के 4G/5G स्मार्टफोन के लिए होगा। जियो और गूगल मिलकर भारत को 2G-मुक्त बनाएंगे। मुकेश अंबानी ने यह भी बताया कि, ‘सर्च इंजन कंपनी गूगल ने जियो के प्लेटफॉर्म में 33,737 करोड़ रुपए का निवेश किया है। इस निवेश के जरिए जियो में गूगल की 7.7 फीसदी हिस्सेदारी होगी। यही नहीं, गूगल के साथ स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप की घोषणा भी की गई।’

  • मुकेश अंबानी ने बताया कि, हम स्वदेशी स्तर पर विकसित 5जी सॉल्युशन ट्रायल के लिए तैयार हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को समर्पित होगा।
  • रिलायंस का नया इनोवेशन जियो ग्लास है। इसे किसी फोन से जोड़कर इंटरनेट चलाया जा सकता है। यह एक चश्मा है। इस ग्लास का वजन सिर्फ 75 ग्राम है। यह एक केबल से जुड़ा होगा। इसमें ऑडियो यानी गीत संगीत भी चलेगा और 25 ऐप्लीकेशन चलेगा। इसमें 2डी और 3डी वीडियो चैटिंग होगी।
  • रिलायंस ने यह भी दावा किया है कि जियो मीट भारत का सबसे सुरक्षित वर्चुअल मीटिंग ऐप है। वहीं, जियो मार्ट जल्द ही किराना डिलाइट शुरू करेगा। इस प्लेटफॉर्म से किराना दुकानदारों को जोड़ा जाएगा। इसके जरिए कस्टमर्स आपका सपोर्ट हमारा थीम पर काम होगा।
  • रिलायंस जियो एंट्री लेवल 5जी स्मार्टफोन लेकर आएगी। इसके अलावा गूगल के साथ मिलकर रिलायंस एक एंड्रॉयड बेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करेगी। इसका मकसद हर भारतीय के हाथ में सस्ता स्मार्टफोन देना है।
  • इस दौरान मुकेश अंबानी ने कहा कि कोरोना संकट आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा संकट है। लेकिन भारत और दुनिया आगे इसके बाद तेज बढ़त हासिल करेगी, यह मुझे विश्वास है। कोई भी संकट एक नया अवसर भी पैदा करता है।
  • मुकेश अंबानी ने कहा कि हम भारत के सबसे बड़े निर्यातक और निजी क्षेत्र के सबसे बड़े टैक्सपेयर्स हैं। जीएसटी और वैट और निजी क्षेत्र में इनकम टैक्स के भी हम सबसे बड़े योगदान करने वाले हैं।
  • मुकेश अंबानी ने कहा कि हम इस बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो—विजुअल माध्यमों से यह एजीएम कर रहे हैं जो कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के सर्कुलर के मुताबिक है।

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