गणतंत्र दिवस की परेड में दिखेगी उप्र, मप्र समेत 16 राज्यों की झांकियां, इन तीन राज्यों को नहीं मिली अनुमति

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चैतन्य भारत न्यूज

पटना. दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस (Republic Day) परेड में इस बार कुल 22 झांकियां दिखाई देंगी। सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय की कमेटी ने 16 राज्यों और 6 मंत्रालयों-विभागों को इजाजत दी है।


इन राज्यों की झांकी को मिली इजाजत

बता दें इस बार गणतंत्र दिवस पर पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार की झांकी नहीं देखने को मिलेगी। जिन राज्यों की झांकी गणतंत्र दिवस पर रौनक बढ़ाएगी उनमें आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मेघालय, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। इसके अलावा शिपिंग मंत्रालय, गृह मंत्रालय समेत 6 मंत्रालयों-विभागों को भी इजाजत मिली है।

यह थी बिहार की झांकी की थीम

सूत्रों के मुताबिक, बिहार की ‘जल, जीवन और हरियाली’ थीम पर अनुमति नहीं मिली है। बिहार की झांकी को शामिल नहीं किए जाने को लेकर केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने कहा, ‘इस संबंध में मैं राजनाथ सिंह से बात करूंगा कि बिहार की झांकी को परेड समारोह में शामिल किया जाए और झांकी को शामिल करना भी चाहिए। यह बिल्कुल गलत बात है। आज पूरी दुनिया की सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण की सुरक्षा है।’

महाराष्ट्र की जनता का अपमान : एनसीपी

इसके अलावा महाराष्ट्र की झांकी को भी अनुमति नहीं मिली। इसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और शिवसेना ने गुरुवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा। एनसीपी ने तो इसे राज्य की जनता का अपमान तक बता दिया है। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले का दावा है कि, केंद्र ने गणतंत्र दिवस परेड के लिए गैर-भाजपा शासित महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकियों को अनुमति नहीं दी है।

ये है झांकी तय करने की प्रक्रिया

बता दें 26 जनवरी की परेड में झांकी को शामिल करने की एक प्रक्रिया होती है। रक्षा मंत्रालय सबसे पहले सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों या विभागों से प्रस्ताव आमंत्रित करता है। फिर एक कमेटी इनकी सबकी स्क्रीनिंग करती है। इस कमेटी में कला, संस्कृति, पेंटिंग, संगीत जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल होते हैं। इस बार गणतंत्र दिवस के लिए रक्षा मंत्रालय को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मंत्रालयों के कुल 56 प्रस्ताव मिले थे। इनमें 32 प्रस्ताव राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के थे और प्रस्ताव 24 मंत्रालयों और विभागों से थे। इसे लेकर पांच मीटिंग की गई और फिर कमेटी ने 56 में से 22 प्रस्तावों को अपनी मंजूरी दी।

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