कोरोना वायरस: इंदौर में गलियों-मोहल्लों में घूमकर जानकारी देगा, तो जयपुर में कोरोना मरीजों को दवा और भोजन देगा रोबोट

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चैतन्य भारत न्यूज

इंदौर/जयपुर. भारत में कोरोना वायरस का कहर जारी है। रोजाना कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। देश में अब तक कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों की संख्या 750 तक पहुंच गई है और 18 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। कोरोना मरीजों को दवाएं देने के लिए और इस वायरस के संक्रमण, लक्षण और इससे बचाव की जानकारी देने के लिए अब रोबोट का सहारा लिया जा रहा है।

जागरूक कर रहे रोबोट

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में एक रोबोट तैयार किया गया है। इस रोबोट में कोरोना वायरस से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी डाली गई है। साथ ही कोरोना के अंदर कोरोना वायरस के प्रति जागरूक करने के लिए एक संदेश भी डाला गया है। रोबोट सेंसर तकनीक से चलेगा और शहर की गली-मोहल्ले में घूमकर लोगों को जागरूक कर सकेगा। लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए इंसानों की जगह इस रोबोट को तैनात किया जाएगा। इस रोबोट को शहर के युवा मुदित ठक्कर और लोकेंद्र जोहरे ने एक महीने में तैयार किया है। रोबोट में लगे सेंसर तुरंत इंसान की पहचान कर सकते हैं और वो किसी व्यक्ति के सामने आते ही उनसे बात करने लगता है। इस रोबोट को फिलहाल अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं वाले सार्वजनिक स्थलों तैनात किया जा सकता है।

मरीजों तक दवा पहुंचाए रहे रोबोट

सिर्फ लोगों को जागरूक करने के लिए ही नहीं बल्कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को दवा देने के लिए भी रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर के सवाईमानसिंह अस्पताल में रोबोट कोरोना वायरस के मरीजों को दवाई दे रहे हैं। इस रोबोट को ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विकसित किया गया है। दरअसल कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों को दवा देने के लिए चिकित्साकर्मियों को बार-बार उनके संपर्क में आना पड़ता है। ऐसे में उनको भी संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए यह रोबोट बनाया गया है।

7 घंटे तक काम कर सकता है रोबोट

इस रोबोट का नाम सोना 2.5 रखा गया है जिसे रोबोटिक्स इंजीनियर भुवनेश मिश्रा ने बनाया है। बुधवार को अस्पताल प्रशासन ने आइसोलेशन वार्ड में मरीज तक पानी, दवाई आदि पहुंचाने का परीक्षण किया गया जो काफी हद तक सफल रहा। रोबोट का संचालन कंप्यूटर के जरिए एक ही स्थान से किया जा सकेगा। रोबोट अपने अंदर लगे सेंसर की मदद से टारगेट तक पहुंचते हैं। रोबोट को वाई-फाई के जरिए लैपटॉप या स्मार्टफोन किसी से भी चलाया जा सकता है। यह एक बार चार्ज होने के बाद करीब सात घंटे तक काम कर सकता है। रोबोट को पूरा चार्ज होने में तीन घंटे का समय लगता है। रोबोट बनाने वाले इंजीनियर मिश्रा का कहना है कि, ऐसे ही तीन और रोबोट वे अस्पताल को निशुल्क उपलब्ध करवाएंगे। जब जरूरत खत्म हो जाएगी, तो वे इन्हें वापस ले लेंगे।

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