रेलवे के ई-टिकटिंग गिरोह का भंडाफोड़, आतंकी फंडिंग से तार जुड़े होने की आशंका, RPF ने 28 लोगों को किया गिरफ्तार

gulam mustafa

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने ई-टिकटिंग के अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए दलाली करने वाली एक गैंग को पकड़ा है। इस गैंग ने गलत तरीके से पैसे कमाने के इतने तरह के हथकंडे अपनाए जिसके बारे में जानकर जांच एजेंसियां भी हैरान रह गई।


बेंगलुरु से होता था संचालन

जानकारी के मुताबिक, एजेंसियों ने ई-टिकट बुकिंग साफ्टवेयर बेचने वाले गुलाम मुस्तफा समेत 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस गैंग के तार दुबई, बांग्लादेश, सिंगापुर होते हुए पाकिस्तान तक पहुंच रहे हैं जहां से आतंकी फंडिंग का शक है। गैंग का सरगना दुबई में बैठा है और भारत के बेंगलुरु से इसका संचालन होता है।

10 दिनों से मुस्तफा से पूछताछ जारी

सुरक्षा एजेंसियों ने इस संबंध में केंद्रपाड़ा के गुलाम मुस्तफा को 10 दिन पहले गिरफ्तार किया गया है। 10 दिनों तक सुरक्षा एजेंसियों ने मुस्तफा के गैंग से जुड़े अलग-अलग काम करने वाले लोगों के बारे में जानकारी हासिल की। मुस्तफा ई-टिकटिंग बनाने और कन्फर्म करने वाला सॉफ्टवेयर बेचता था। गिरफ्तारी के बाद जब उसके लैपटॉप की जांच की गई तो उसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, मीडिल ईस्ट, इंडोनेशिया और नेपाल तक के लिंक का खुलासा हुआ। मुस्तफा के पास से इन सभी देशों के नंबर भी मिले। मामले की गंभीरता को मद्देनजर रखते हुए अब आइबी और एनआइए ने भी इसकी जांच शुरू कर दी है।

पढ़ा-लिखा नहीं लेकिन कंप्यूटर हैकिंग में एक्सपर्ट

मुस्तफा झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला है। पहले वह बेंगलुरु में रेलवे के टिकट ब्लैक में बेचा करता था। फिर बाद में वह ई-टिकटिंग के सॉफ्टवेयर बेचने का काम करने लगा। वो भले ही पढ़ा-लिखा नहीं है, लेकिन मुस्तफा कंप्यूटर हैकिंग करने में एक्सपर्ट है। मुस्तफा ऑर्गनाइज़ तरीके से सॉफ्ट वेयर डेवेलप करता था और फिर उसे अपने गैंग से जुड़े ग्राहकों को बेंचता था। उसके पास से ANMS सॉफ्टवेयर से IRCTC की 563 आईडी मिली है। उसका संपर्क यात्रियों को टिकट बेचने वाले एजेंट से भी था।

SBI में 2400 बैंक अकॉउंट

पूछताछ के दौरान मुस्तफा ने बताया कि वो बातचीत के लिए विदेशी नंबर का प्रयोग करता है और उसी के जरिए वॉट्स एप चैट पर बात करता है। इसके जरिए उसके पास जो भी पैसा आता था उन्हें मुस्तफा अलग-अलग बैंक एकाउंट्स में जमा करवाता था। आपको जानकर हैरानी होगी कि मुस्तफा के 2400 बैंक अकॉउंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में, जबकि 600 अकॉउंट रीजनल बैंकों में हैं। अधिकारी ने बताया कि उसके लैपटॉप और मोबाइल की फोरेंसिक जांच जारी है।

लैपटॉप-मोबाइल की फोरेंसिक जांच जारी

जब ज्यादा पैसा इकठ्ठा हो जाता था तो मुस्तफा उसे क्रिप्टो करेंसी के जरिए भी इस्तेमाल में लेता था। बता दें क्रिप्टो करेंसी एक डिजिटल करेंसी होती है जिसका प्रयोग किसी सामान की खरीदारी या कोई सर्विस खरीदने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा मुस्तफा के पास से कॉड वर्ड मैसेज भी मिले हैं। अधिकारी ने बताया कि उसके लैपटॉप और मोबाइल की फोरेंसिक जांच जारी है।

सरगना दुबई का और सॉफ्टवेयर कंपनी सिंगापुर की

इस नेटवर्क का सरगना दुबई में रहता है जिसका नाम गुरु जी है। गुरु जी को अब तक पकड़ा नहीं गया है। इसके नेटवर्क एक सॉफ्टवेयर कंपनी से जुड़े हैं। जानकारी के मुताबिक, नेटवर्क से सॉफ्टवेयर कंपनी को भी पैसा भेजा जा रहा है। सिंगापुर पुलिस भी इस मामले में सॉफ्टवेयर कंपनी की जांच कर रही है।

गैंग के कोर ग्रुप में शामिल हैं 225 लोग

आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार के मुताबिक, इस गैंग में सवा दो सौ लोग शामिल हैं। गैंग के सेकेंड लेयर में 18 लोग शामिल हैं। अब तक आरपीएफ ने गैंग के 28 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग टेक्नोलोजी के दुरुपयोग से ही पैसे काम रहा है। पिछले डेढ़ महीने में 17 लाख रुपए मुस्तफा के एकाउंट से गुरु जी के एकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे। पूछताछ के दौरान सामने आया कि इस गैंग के कनेक्शन तहरिक-ए-पाकिस्तान से भी हैं। मुस्तफा के लैपटॉप से पाकिस्तान के भी कई सारे नंबर मिले हैं। इस काम के जरिए ये गैंग हर महीने 15 करोड़ की कमाई कर रहा है। पुलिस अब गैंग से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है।

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