‘सरवना भवन’ के मालिक राजगोपाल का निधन, दूसरे की बीवी हासिल करने के चक्कर में काट रहे थे उम्रकैद की सजा

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चैतन्य भारत न्यूज

साउथ इंडियन फूड रेस्टोरेंट चेन ‘सरवना भवन’ के मालिक 72 वर्षीय पी. राजगोपाल का गुरुवार को निधन हो गया। बता दें राजगोपाल प्रेम-प्रसंग के चक्कर में अपने कर्मचारी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां आज राजगोपाल ने अंतिम सांस ली।

जानकारी के मुताबिक, राजगोपाल ने 9 जुलाई को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। वह कोर्ट भी एंबुलेंस से ही पहुंचे थे। आत्मसमर्पण के बाद 13 जुलाई को राजगोपाल को दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद से ही वह चेन्नई के स्टेनली अस्पताल के जेल वार्ड में भर्ती थे। लेकिन बाद में जब फिर से दिल का दौरा पड़ा तो बेटे सरवनन ने राजगोपाल को निजी अस्पताल में भर्ती करने की कोर्ट से अपील की थी। कोर्ट ने राजगोपाल को निजी अस्पताल में भर्ती करने की अनुमति दे दी थी।

कर्मचारी की हत्या में ठहराए गए थे दोषी

राजगोपाल को अपने ही कर्मचारी की पत्नी से प्यार हो गया था जिसके चलते उन्होंने राजकुमार शांताकुमार का अपहरण करवाकर उसकी हत्या कर दी थी। इन दोनों ही मामलों में कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया था। शांताकुमार, जीवनज्योति नामक एक महिला का पति था। राजगोपाल जीवनज्योति से बेइंतहा मोहब्बत करने लगे थे  और वो उससे शादी करना चाहते थे। दरअसल, एक ज्योतिषी की भविष्यवाणी भी थी कि अगर राजगोपाल की जीवनज्योति से शादी होती है तो वह देश के सबसे अमीर लोगों में से एक बन जाएंगे। जीवनज्योति जब राजगोपाल से शादी करने के लिए नहीं मानी तो उसने जीवनज्योति और शांताकुमार के बीच लड़ाई करवाने की कोशिश शुरू कर दी। फिर दोनों ने शहर छोड़कर भागने की कोशिश की तो राजगोपाल ने 8 लोगों को शांताकुमार की हत्या की सुपारी दे दी और जीवनज्योति का सुहाग उजाड़ दिया।

मद्रास हाई कोर्ट ने सजा बढ़ाकर की थी उम्रकैद

शांताकुमार की हत्या के मामले में निचली अदालत ने राजगोपाल को पहले दस साल की सजा सुनाई थी। फिर राजगोपाल ने इस फैसले के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी जहां कोर्ट ने 10 साल की सजा को बढ़ाकर उम्रकैद में बदल दिया गया था। मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

गौरतलब है कि राजगोपाल ने 1981 में अपना पहला रेस्टोरेंट ऐसे समय पर खोला जब बाहर खाना ज्यादातर भारतीयों के लिए असामान्य बात हुआ करती थी। धीरे-धीरे राजगोपाल ने देश के साथ ही सिंगापुर, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, नॉर्थ अमेरिका समेत कई देशों में सरवना भवन की शाखाएं खोल लीं।

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