जयंती विशेष : वल्लभभाई पटेल को सबसे पहले ‘सरदार’ किसने कहा? जानिए ‘लौह पुरुष’ के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें

चैतन्य भारत न्यूज

‘लौहपुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की आज 145वीं जयंती है। भारत को आजादी दिलाने में सरदार वल्लभभाई पटेल का अहम योगदान माना जाता है। उन्होंने भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए देसी रियासतों को एक किया और उन्होंने देश को एक करने के लिए अपना महत्वपूर्ण कदम उठाया। इस खास मौके पर जानते हैं सरदार वल्लभभाई पटेल से जुड़ी कुछ खास बातें-

पटेल ने अखंड भारत का निर्माण किया

गुजरात के नाडियाड में 31 अक्टूबर साल 1875 को जन्मे सरदार वल्लभभाई पटेल को नए भारत का शिल्पकार कहा जाता है। आजादी के बाद टुकड़ों में बंटी 565 रियासतों का विलय करके सरदार पटेल ने अखंड भारत का निर्माण किया था। इस काम में पटेल का साथ दिया था उनके प्रिय सहयोगी वीपी मेनन ने।

स्कूल के दिनों से अन्याय के खिलाफ लड़ना शुरू किया

कहते हैं कि बचपन में सरदार पटेल हमेशा से अन्याय के खिलाफ लड़ते रहे और इसकी शुरुआत नडियाद में स्कूल में से ही शुरू हो गई थी। बात उन दिनों की है जब वल्लभभाई पटेल प्राइमरी स्कूल में पढ़ते थे। उन दिनों नियम था कि छात्रों को किताबें और पेंसिल शिक्षकों से खरीदनी पड़ती थी। पटेल को ये बात पसंद नहीं आई। उन्होंने अपने साथ के बच्चों को इकट्ठा किया और स्कूल में आंदोलन कर दिया। 6 दिन तक चले आंदोलन के बाद स्कूल प्रशासन को झुकना पड़ा और ये नियम हटा लिया गया।

22 साल की उम्र में 10वीं पास की

सरदार पटेल को अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने में काफी समय लगा। उन्होंने 22 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास की। सरदार पटेल का सपना वकील बनने का था और अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्हें इंग्लैंड जाना था, लेकिन उनके पास इतने भी आर्थिक साधन नहीं थे कि वे एक भारतीय महाविद्यालय में प्रवेश ले सकें। उन दिनों एक उम्मीदवार व्यक्तिगत रूप से पढ़ाई कर वकालत की परीक्षा में बैठ सकते थे। ऐसे में सरदार पटेल ने अपने एक परिचित वकील से पुस्तकें उधार लीं और घर पर पढ़ाई शुरू कर दी।

इन्होने दिया ‘सरदार’ नाम

कहते हैं कि सरदार वल्लभभाई पटेल को महिलाओं ने सरदार की उपाधि पहली बार दी थी। बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पटेल को पहली बार महिलाओं ने सरदार कहकर पुकारा था। भारत की आजादी के दौरान विभिन्न रियासतों को एक करने में अहम भूमिका निभाई गई। जिसके चलते उन्हें भारत का बिस्मार्क और लौहपुरुष कहा गया।

गांधी जी के थे करीबी

सरदार पटेल महात्मा गांधी के काफी करीबी थे। गांधीजी से प्रभावित होकर की वल्लभभाई पटेल स्वाधीनता की लड़ाई में शामिल हुए थे। पटेल ने गांधीजी से वादा किया था कि वे जवाहरलाल नेहरू का हमेशा सहयोग करेंगे। यही वजह है कि कई मसलों पर मतभेद के बावजूद पटेल कभी नेहरू के खिलाफ नहीं गए। जब 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई तो पटेल को काफी धक्का लगा। उन्हें दिल का दौरा पड़ा। वे कभी इस बात से उबर नहीं पाए। महात्मा गांधी की मौत के 2 साल बाद 15 दिसंबर 1950 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने सदा के लिए आंखें मुंद लीं।

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी विश्व की ऊंची प्रतिमा

आजादी के बाद बनी पहली अंतरिम कैबिनेट में पटेल उपप्रधानमंत्री बने। बतौर गृहमंत्री पूरे भारत का एकीकरण किया।सरदार वल्लभभाई पटेल को साल 1991 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। गुजरात में नर्मदा नदी के किनारे सरदार सरोवर बांध से साढ़े 3 किमी दूर सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा बनाई गई है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के नाम से लोकप्रिय सरदार पटेल की प्रतिमा विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है।

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