जयंती विशेष : ‘भारत कोकिला’ के नाम से प्रसिद्ध रही सरोजिनी नायडू, जानें पहली महिला गवर्नर से जुड़ी खास बातें

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चैतन्य भारत न्यूज

आज स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री सरोजिनी नायडू की जयंती है, जिन्हें ‘भारत कोकिला’ के नाम से भी जाना जाता था। 13 फरवरी 1879 को जन्मीं देश की पहली महिला गवर्नर सरोजिनी नायडू उन महिलाओं में से हैं, जिन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए कठिन संघर्ष किया। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सरोजिनी नायडू से जुड़ी कुछ खास बातें जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं।



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  • सरोजिनी का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। सरोजिनी स्वतंत्रता सेनानी, कवयित्री और देश की पहली महिला गवर्नर थीं। सरोजिनी आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। उनके एक भाई विरेंद्रनाथ क्रांतिकारी थे और एक भाई हरिद्रनाथ कवि, कथाकार और कलाकार थे। सरोजिनी बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में अच्छी थी। उन्होंने 12 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा में टॉप किया था।
  • 16 वर्ष की आयु में वो इंग्लैंड गई। वहां पहले उन्होंने किंग कॉलेज लंदन में दाखिला लिया, उसके बाद कैम्ब्रिज के ग्रीतान कॉलेज से शिक्षा हासिल की। वहां वे उस दौर के प्रतिष्ठित कवि अर्थर साइमन और इडमंड गोसे से मिलीं। इडमंड ने सरोजिनी को भारतीय विषयों को ध्यान में रख कर लिखने की सलाह दी। उन्होंने नायडू को भारत के पर्वतों, नदियों, मंदिरों और सामाजिक परिवेश को अपनी कविता में समाहित करने की प्रेरणा दी।

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  • सरोजिनी ने साहित्य के क्षेत्र में खास योगदान दिया। बचपन से ही वह कविताएं लिखा करती थीं। उनकी कविताओं का पहला संग्रह ”द गोल्डन थ्रेसहोल्ड” 1905 में प्रकाशित हुआ था जो काफी लोकप्रिय रहा। सरोजिनी बहुभाषाविद थी और क्षेत्रानुसार अपना भाषण अंग्रेजी, हिंदी, बंगला या गुजराती में देती थीं। लंदन की सभा में अंग्रेजी में बोलकर इन्होंने वहां उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था।
  • सरोजिनी साल 1914 में इंग्लैंड में पहली बार महात्मा गांधीजी से मिलीं और उनके विचारों से प्रभावित होकर देश के लिए समर्पित हो गईं। उन्होंने गांधी जी के अनेक सत्याग्रहों में भाग लिया और 1942 में ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में जेल भी गईं।

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  • सरोजिनी साल 1925 में कानपुर में हुए कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षा बनीं और 1932 में भारत की प्रतिनिधि बनकर दक्षिण अफ्रीका भी गईं। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष थीं और भारत की स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद वे उत्तरप्रदेश की पहली राज्यपाल भी बनीं। उन्होंने साल 1898 में डॉक्टर गोविंदराजुलू नायडू से शादी कर ली।
  • सरोजिनी की 2 मार्च 1949 को लखनऊ में अपने कार्यालय में काम करने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।

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