सऊदी अरब में कोड़े मारने की सजा पर रोक, अब होगी कैद या जुर्माना

चैतन्य भारत न्यूज

रियाद. सऊदी अरब में अब से अपराधियों को कोड़े मारने की सजा नहीं दी जाएगी। सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कोड़े मारने की सजा को खत्म करने का आदेश दिया है। अब यहां कोड़े मारने की सजा को जेल या जुर्माने में बदल दिया गया है। सऊदी अरब के शाह और युवराज (क्राउन प्रिंस) द्वारा मानवाधिकार की दिशा में उठाया गया यह कदम सराहनीय है।

हजार-हजार कोड़े मारे जाते थे

बता दें सऊदी अरब की अदालतों द्वारा दी जाने वाली कोड़े मारने की सजा का पूरी दुनिया के मानवाधिकार समूह विरोध करते हैं। कई बार तो यहां की अदालतें हजार-हजार कोड़े तक मारने की भी सजा सुनाती हैं। लेकिन अब देश में कोड़े मारने की सजा के बजाय कैद और जुर्माना जैसी सजाएं दी जाएंगी। सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि, कोड़े या बेंत मारने की सजा खत्म करने का मकसद यह है कि देश को शारीरिक दंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के मानदंडों के और करीब लाना है।

कोड़े की जगह दी जाएगी ये सजाएं

शुक्रवार को जारी निर्देश को किंग सलमान और उनके बेटे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान द्वारा मानवाधिकार सुधारों को विस्तार देने के लिए उठाया गया कदम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, भविष्य मंश विभिन्न अपराधों में सजा के तौर पर अदालतों को जुर्माने या जेल भेजने की सजा देनी होगी। ऐसे मामले जिनमें जेल की सजा नहीं दी जा सकती उसमें सामुदायिक सेवा की सजा दी जाएगी।

2015 में आया था कोड़े की सजा का आखिरी मामला

सऊदी अरब में कोड़े मारने का आखिरी मामला साल 2015 में सामने आया था। एक ब्लॉगर रईफ बदावी को जनता के सामने कोड़े मारने की सजा सुनाई गई थी। जानकारी के मुताबिक, बदावी पर उसकी वेबसाइट ‘सऊदी लिबरल नेटवर्क’ पर इस्लाम का अपमान करने और साइबर क्राइम के आरोप थे। बदावी को जून 2012 में गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने बदावी को 10 साल कैद और एक हजार कोड़े मारने की सजा दी गई थी। बदावी की सजा की अमेरिका और दुनियाभर के मानवाधिकार संस्थाओं ने निंदा की थी।

महिलाओं को दी थी कार चलाने की अनुमति

गौरतलब है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस लमान ने अपने देश में कई उदारवादी नीतियां अपनाई हैं। उन्होंने साल 2018 में देश में महिलाओं को कार चलाने की अनुमति दी थी। इसे सऊदी का एतिहासिक क्षण बताया गया था। सभी देशों द्वारा क्राउन प्रिंस की कई कोशिशों को सराहा गया है, लेकिन मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी है।

 

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