SC का आदेश- सभी पार्टियां आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की जानकारी वेबसाइट दें, और उन्हें चुनने का कारण बताएं

supreme court,mumbai,maharashtra supreme court

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को आदेश दिया है कि, वे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अपने सभी उम्मीदवारों को चुनने की वजह अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें। कोर्ट ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि पिछले चार चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं की संख्या में वृद्धि हुई है।



न्यायाधीश रोहिंटन फली नरीमन और एस रविंद्र भट की दो सदस्यीय की पीठ ने ये फैसला सुनाया। यह फैसला वकील और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय और अन्य द्वारा दायर उस अवमानना याचिका पर सुनाया है, जिसमें कहा गया था कि, ‘इस मामले में साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार और उनकी राजनीतिक पार्टियां आपराधिक केसों की जानकारी वेबसाइट पर जारी करेंगी और नामांकन दाखिल करने के बाद कम से कम तीन बार इसके संबंध में अखबार और टीवी चैनलों पर देना होगा लेकिन इस संबंध में कदम नहीं उठाया गया।’

अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, ‘राजनीतिक पार्टियों को 48 घंटे के भीतर अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर विवरण अपलोड करना अनिवार्य होगा। साथ ही पार्टियों को चुनाव आयोग को 72 घंटे के भीतर ब्यौरा देना होगा।’ सुप्रीम कोर्ट ने सभी पार्टियों को अखबारों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अपनी वेबसाइट पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन का कारण बताते हुए वेबसाइट पर उनका परिचय पत्र, उपलब्धियां और उनके अपराध का विवरण अपलोड करने का भी आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि, जो भी राजनीतिक दल इसका पालन नहीं करता है वह अवमानना के उत्तरदायी होंगे। कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी यह निर्देश दिया है कि, जो भी दल इस आदेश का पालन करने में विफल रहता है उसके खिलाफ अदालत में अवमानना याचिका दायर करे।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि, ‘उम्मीदवारों के चयन करने का कारण उनकी योग्यता के आधार पर होना चाहिए, न कि जीतने के आधार पर। जीतने की काबिलियत तर्कसंगत नहीं हो सकता।’

बता दें जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 दोषी राजनेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाती है। लेकिन ऐसे नेता जिन पर केवल मुकदमा चल रहा है, वे चुनाव लड़ने के लिये स्वतंत्र हैं। भले ही उनके ऊपर लगा आरोप कितना भी गंभीर है।

ये भी पढ़े…

दिल्ली चुनाव: 35% उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज, 32 के खिलाफ महिला अत्याचार के मामले

1993 से अबतक दिल्ली में कुल 6 बार हुए चुनाव, देखें कब किसके सिर सजा मुख्यमंत्री का ताज

Related posts