अलगाव की चिंता भी बच्चों में गंभीर समस्या, उबार सकता है सहयोग, स्कूल की अच्छी बातें

Separation anxiety

चैतन्य भारत न्यूज

कम उम्र में बच्चे अकसर माता-पिता से अलगाव के डर (सेपरेशन एंग्जाइटी) से ग्रस्त हो जाते हैं। खासतौर पर शुरुआती दौर में स्कूल जाते वक्त उन्हें लगता है कि वो पैरेंट्स से दूर हो रहे हैं इसलिए वे काफी ना-नुकुर करते हैं। बच्चों को पैनिक अटैक आना, रातभर सो नहीं पाना, बुरे सपने से डर जाना, अपहरण की बातें सोचकर डरना, बीमार पड़ जाना, डर से बुखार आना, जिद करना जैसे लक्षण काफी अहम हैं। इन पर ध्यान देने की जरूरत है।

मनोचिकित्सकों (साइकेट्रिस्ट) के मुताबिक अलगाव का यह डर ज्यादातर कामकाजी अभिभावकों के बच्चों में देखा जाता है। यदि ऐसे अभिभावक बच्चों को वक्त पर न संभालें तो यह बच्चों के भविष्य पर गहरा असर डालता है। यह समस्या उन बच्चों में भी हो सकती हैं जिनके माता-पिता ओवरप्रोटेक्टिव हैं यानी जरूरत से ज्यादा बच्चों की चिंता करते हैं।

स्कूल जाने की वजह से बच्चों में यह समस्या न हो इसके लिए बच्चों को स्कूल में डालने से पहले ही उन्हें स्कूल के बारे में अच्छी-अच्छी बातें बताइए। उससे जुड़ी पॉजिटिव कहानियां सुनाइए। उन्हें समझाइए कि स्कूल में उन्हें नए-नए दोस्त मिलेंगे, खेलने के लिए बड़ा मैदान और कई तरह के खेल मिलेंगे। इस तरह उनके मन में स्कूल को लेकर अच्छी छवि बनाइए और बताइए कि उन्हें स्कूल में बहुत मजा आने वाला है। स्कूल को लेकर बच्चे जितना उत्सुक और जागरूक होंगे उन्हें स्कूल भेजना उतना ही आसान होगा। अभिभावक या दादा- दादी उन्हें ले जाकर शिक्षक से मिलवाएं ताकि वे उनसे वाकिफ हो जाएं।

बच्चों से सहज व्यवहार करें अभिभावक 

  • बच्चे को स्कूल छोड़ने जाते समय गुड बाय बोलने का एक तरीका तय कीजिए। उसकी पीठ थपथपाइए, गले लगाइए और हाथ मिलाइए।
  • आपने जो तरीका तय किया है उसे रोज अपनाइए। ये आपकी ओर से बच्चे को इस बात का सिग्नल होगा कि अब तुम खुश होकर स्कूल जा सकते हो।
  • स्कूल से वापस आने का वक्त बच्चों को बताइए।
  • लौटने के बाद उससे स्कूल के बारे में, उसकी बातें पूछिए। रुचि लेकर देखिए कि उसने क्या पढ़ा।
  • बच्चे को बचपन से सच बोलना सिखाइए लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप उसके साथ कभी झूठ मत बोलिए। अकसर बच्चे जो सिखाया जाए उसकी बजाए जो देखते हैं वह सीखते हैं।

 

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