शादी का झूठा वादा कर सहमति से संबंध बनाना भी दुष्कर्मः कोर्ट

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चैतन्य भारत न्यूज।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाना भी दुष्कर्म की श्रेणी में आता है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के जूनियर डॉक्टर अनुराग सोनी की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने यह व्यवस्था दी। सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. सोनी को दुष्कर्म का दोषी माना, हालांकि उसकी 10 साल  कैद की सजा को कोर्ट ने घटाकर सात साल कर दिया।

जस्टिस एल. नागेश्वर राव और एमआर शाह की बेंच ने 9 अप्रैल को दिए फैसले में कहा कि झूठा वादा कर सहमति लेना धारा-90 के तहत अपराध है। ऐसी सहमति बचाव का तर्क नहीं बन सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि, ‘आरोपित ने झूठा वादा किया था। इसे सहमति नहीं माना जा सकता। ऐसे संबंध को बलात्कार ही माना जाएगा क्योंकि उसका इरादा शादी का नहीं वासना पूरी करने का था।’

हत्या में नष्ट होता है शरीर, बलात्कार में आत्मा

कोर्ट ने टिप्पणी में कहा कि, बलात्कार समाज के खिलाफ किया गया अपराध है, जो शरीर और नैतिकता के खिलाफ किया जाता है। इसमें शरीर, दिमाग और निजता पर हमला किया जाता है। हत्या शरीर को नष्ट करती है जबकि बलात्कार आत्मा को अपवित्र कर अपमानित करता है। बलात्कार महिला के सर्वौच्च सम्मान पर आघात होता है।

दोषी ने किसी अन्य से कर ली थी शादी

दोषी सरकारी अस्पताल में जूनियर डॉक्टर था। पीड़िता युवती बी. फार्मेसी की पढ़ाई कर रही थी। दोनों में 2009 से प्यार था। डॉक्टर ने लड़की से झूठा वादा कर उससे शारीरिक संबंध बनाए लेकिन बाद में शादी करने से इनकार कर दिया।दूसरी युवती से शादी भी कर ली। पीड़िता ने 21 जून 2013 को मालखरौदा थाने में बलात्कार का मामला दर्ज करवाया।सेशन कोर्ट और हाई कोर्ट ने आरोपित डॉक्टर को 10 साल कैद की सजा सुनाई थी। उसने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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