जानिए कब है शरद पूर्णिमा? इसका महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्‍यता है कि शरद पूर्णिमा का व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन चंद्रमा, माता लक्ष्‍मी और भगवान विष्‍णु की पूजा की जाती है। इस बार शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को पड़ रही है। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा का महत्व और पूजा-विधि।



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शरद पूर्णिमा का महत्व

हिंदू मान्यता के मुताबिक, इसी दिन धन की देवी मां लक्ष्‍मी का जन्‍म हुआ था। साथ ही कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात लक्ष्‍मी माता आसमान में विचरण करती हैं और जागने वाले भक्‍तों को धन-वैभव का वरदान देती हैं। कहा जाता है कि जो विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखती हैं उन्‍हें संतान की प्राप्‍ति होती है। जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनके बच्‍चे दीर्घायु होते हैं। अगर कुंवारी लड़कियां ये व्रत रखें तो उन्‍हें मनचाहा पति मिलता है।

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शरद पूर्णिमा की पूजा-विधि

  • इस दिन स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें और दिन भर व्रत का संकल्‍प लें।
  • इसके बाद मंदिर या पूजा स्‍थान पर पीतल, चांदी, तांबे या सोने से बनी लक्ष्‍मी की प्रतिमा को कपड़े से ढककर पूजा करें।
  • अब हाथ में फूल लेकर मां का आह्वाहन करें।
  • इसके बाद मां की प्रतिमा को पंचामृत और फिर शुद्ध जल अर्पित करें।
  • इसके बाद रात्रि के समय चंद्रोदय होने पर घर में घी के 11 दीपक जलाएं।
  • फिर रात 12 बजे सबसे पहले मां लक्ष्‍मी को खीर का भोग लगाएं।
  • अब इस खीर को घर के सभी लोगों में प्रसाद स्‍वरूप वितरण करें।
  • आप स्‍वयं भी प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

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पूजा का शुभ मुहूर्त

कोजागर पूर्णिमा तिथि : रविवार, 13 अक्‍टूबर 2019

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 13 अक्‍टूबर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समाप्‍त : 14 अक्‍टूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक

चंद्रोदय का समय : 13 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

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