शरद पूर्णिमा पर इस सरल विधि से करें पूजा और पाएं मनचाहा वरदान, आज के दिन ये काम जरूर करें

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में सभी पूर्णिमा में आश्विन महीने की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। आश्विन मास के शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के तौर पर मनाया जाता है। इस बार 31 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा है। इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। मान्‍यता है कि शरद पूर्णिमा का व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन चंद्रमा, माता लक्ष्‍मी और भगवान विष्‍णु की पूजा की जाती है।



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 शरद पूर्णिमा का महत्व

हिंदू मान्यता के मुताबिक, इसी दिन धन की देवी मां लक्ष्‍मी का जन्‍म हुआ था। साथ ही कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात लक्ष्‍मी माता आसमान में विचरण करती हैं और जागने वाले भक्‍तों को धन-वैभव का वरदान देती हैं। कहा जाता है कि जो विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखती हैं उन्‍हें संतान की प्राप्‍ति होती है। जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनके बच्‍चे दीर्घायु होते हैं। अगर कुंवारी लड़कियां ये व्रत रखें तो उन्‍हें मनचाहा पति मिलता है।

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शरद पूर्णिमा पर क्या करें 

  • शरद पूर्णिमा पर चंद्र की किरणें हमें लाभ पहुंचाती हैं। इसलिए इस रात में कुछ देर चांद की चांदनी में बैठना चाहिए। ऐसा करने पर मन को शांति मिलती है और तनाव दूर होता है।
  • शरद पूर्णिमा की रात में चांद की रोशनी में बैठकर चांदी के बर्तन में भोजन करने से मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं।
  • शरद पूर्णिमा के चांद को खुली आंखों से देखना चाहिए। क्योंकि इससे आंखों की समस्या नहीं होती।
  • इस दिन व्रत रखें और पूर्णिमा की रात्रि में जागरण करें। व्रत करने वाले को चंद्र को अर्घ्य देने के बाद ही अन्न ग्रहण करना चाहिए।

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  • शरद पूर्णिमा की रात घर के बाहर दीपक जलाना चाहिए। इससे घर में सकारात्मकता बढ़ती है।
  • माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मखाने और चावल की खीर का भोग लगाना चाहिए।
  • मां लक्ष्‍मी को जो वस्‍तुएं प्रिय हैं, उनमें से एक दही भी है। शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्‍मी को गाय के दूध से बने दही का भी भोग लगाएं।

शरद पूर्णिमा की पूजा-विधि

  • इस दिन स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें और दिन भर व्रत का संकल्‍प लें।
  • इसके बाद मंदिर या पूजा स्‍थान पर पीतल, चांदी, तांबे या सोने से बनी लक्ष्‍मी की प्रतिमा को कपड़े से ढककर पूजा करें।
  • अब हाथ में फूल लेकर मां का आह्वाहन करें।
  • इसके बाद मां की प्रतिमा को पंचामृत और फिर शुद्ध जल अर्पित करें।
  • इसके बाद रात्रि के समय चंद्रोदय होने पर घर में घी के 11 दीपक जलाएं।
  • फिर रात 12 बजे सबसे पहले मां लक्ष्‍मी को खीर का भोग लगाएं।
  • अब इस खीर को घर के सभी लोगों में प्रसाद स्‍वरूप वितरण करें।
  • आप स्‍वयं भी प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

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