नवरात्रि : आज महिलाएं खासतौर से करें सिद्धियों की देवी मां शैलपुत्री की पूजा, इस मंत्र के जाप से होगी पूजा सफल

maa shailputri

चैतन्य भारत न्यूज

29 सितंबर यानी आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मान्यता है कि, पहले दिन पूजे जाने वाली देवी के इस रूप का नाम शैलपुत्री इसलिए पड़ा क्योंकि उनका जन्म राजा हिमालय के यहां हुआ था। ‘शैल’ का अर्थ होता है चट्टान और ‘पुत्री’ का मतलब है बेटी। बता दें मां शैलपुत्री बैल की सवारी करती हैं और इनके दाएं हाथ में में त्रिशूल और बाएं में कमल होता है। मां शैलपुत्री अपने माथे पर चांद भी पहनती हैं। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। जिस भी व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और शक्ति की कमी है उन्हें मां शैलपुत्री की पूजा अवश्य करनी चाहिए। खासतौर से महिलाओं के लिए तो मां शैलपुत्री की पूजा शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करते समय यदि उनके मंत्र का 11 बार जाप करते हैं तो व्यक्ति का मूलाधार चक्र जाग्रत होता है।


मां शैलपुत्री की पूजा विधि

  • सबसे पहले आप जिस भी स्थान पर पूजा करने वाले हैं, वहां अच्छी तरह से सफाई करें।
  • फिर वहां पर लकड़ी के एक पाटे पर मां शैलपुत्री की तस्वीर रखें। उस तस्वीर को शुद्ध जल से साफ करें।
  • कलश स्थापना करने के लिए लकड़ी के पाटे पर पहले एक लाल कपड़ा बिछाएं।
  • फिर अपने हाथ में कुछ चावल के दाने लेकर भगवान गणेश का ध्यान करते हुए उन्हें पाटे पर रख दें।
  • जिस भी कलश को स्थापित करना है उसमें शुद्ध जल भरें और फिर उसके ऊपर आम के पत्ते लगाएं।
  • इसके बाद पानी वाला नारियल उस कलश पर रखें। ध्यान रहे नारियल पर कलावा और चुनरी भी जरूर बांधें।
  • नारियल रखने के बाद कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और फिर कलश को स्थापित कर दें।
  • कलश स्थापना के बाद पाटे के एक तरफ के हिस्से में मिट्टी फैलाएं और उस मिट्टी में जौं डाल दें।
  • मां शैलपुत्री को कुमकुम लगाएं। फिर उन्हें चुनरी उढ़ाएं और उनके सामने घी का दीपक जलाएं।
  • अज्ञारी देते समय उसमे सुपारी, लोंग, घी, प्रसाद इत्यादि का भोग लगाएं।
  • अंत में नौ दिनों के व्रत का संकल्प लें और मां शैलपुत्री की कथा पढ़ें। (व्रत संकल्प इच्छानुसार)

ये हैं मां शैलपुत्री के मंत्र

  • ऊँ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:
  • वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम्। वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥
  • वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम्। वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥
  • या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

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