परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए ऐसे करें शीतला माता की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

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चैतन्य भारत न्यूज

होली के  आठवें दिन शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है और ठंडा भोजन किया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और गुजरात में मनाया जाता है। उत्तर भारत में शीतला अष्टमी को बसौड़ा, लसौड़ा या बसियौरा भी कहा जाता है। इस साल शीतला अष्टमी 4 अप्रैल को पड़ रही है। शीतला अष्टमी पर सुहागिन महिलाएं शीतला माता की पूजा कर अपने परिवार की सुख शांति की कामना करती हैं।


शीतला अष्टमी 

अष्टमी तिथि शुरू होने का समय – 4 अप्रैल को सुबह 04:13 से
अष्टमी तिथि खत्म होने का समय – 5 अप्रैल को रात 03 बजे तक

कैसे की जाती है शीतला अष्टमी की पूजा

  • शीतला माता की पूजा सूर्योदय से पहले होती है।
  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है।
  • फिर शीतला माता के मंदिर में जाकर देवी को ठंडा जल अर्पित कर उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है।
  • देवी को श्रीफल (नारियल) अर्पित करते हैं और एक दिन पूर्व पानी में भिगोई हुई चने की दाल चढ़ाई जाती है।
  • शीतला माता को ठन्डे भोजन का नैवेद्य लगता है इसलिए भोजन एक दिन पहले ही बनाकर रख लिया जाता है।
  • मंदिर में शीतला माता की पूजा कर उनकी कथा सुनने के बाद घर आकर मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर हल्दी से हाथ के पांच पांच छापे लगाए जाते हैं।
  • शीतला माता को जो जल अर्पित किया जाता है उसमें से थोड़ा-सा बचाकर उसे पूरे घर में छींट देते हैं। ऐसा करने से देवी की कृपा हमेशा बनी रहती है।
  • शीतला सप्तमी/अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। इस दिन लोग खाने में भी एक दिन पूर्व बना हुआ ठंडा भोजन करते हैं।

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