उद्धव ठाकरे के बयान के बाद साईं बाबा के जन्मस्थान पर गहराया विवाद, अनिश्चित काल के लिए शिरडी बंद का ऐलान

sai baba

चैतन्य भारत न्यूज

शिरडी के साईं बाबा को लेकर शुरुआत से ही विवाद रहा है। कभी उनके धर्म और जाति को लेकर विवाद हुआ तो कभी साईं बाबा की जन्मस्थली को लेकर। कई हिंदू संगठनों ने साईं बाबा की पूजा का विरोध भी किया। लेकिन अब साईं बाबा का जन्म कब और कहां हुआ इसे लेकर विवाद काफी ज्यादा बढ़ गया है।



इस विवाद के पीछे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की वो घोषणा है, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र के पाथरी गांव को साईं बाबा की जन्मस्थली माना था और उसके विकास के लिए 100 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया। साईं बाबा के भक्त और शिरडी साईं ट्रस्ट का कहना है कि, ‘उन्हें इस बात से कोई आपत्ति नहीं है कि मुख्यमंत्री ने पाथरी गांव को विकास के लिए क्यों 100 करोड़ रुपए दिए। लेकिन वो इस बात से सहमत नहीं है कि साईं बाबा का जन्म पाथरी में हुआ था।

कहा जाता है कि साईं बाबा का जन्म महाराष्ट्र के पाथरी (पातरी) गांव में 28 सितंबर 1835 को हुआ था। लेकिन कुछ लोग विरोध कर उनका जन्म 27 सितंबर 1838 को आंध्रप्रदेश के पथरी गांव में होना बताते हैं। वहीं शिरडी के लोगों का कहना है कि साईं बाबा का जन्म शिरडी में ही हुआ था। साईं बाबा शिरडी में ही 1854 में युवावस्था में नजर आए। फिर वह कुछ सालों के लिए कहीं और चले गए और इसके बाद वापस शिरडी आ गए थे और फिर जीवनभर वहीं रहे थे। लेकिन साईं के जन्म को लेकर कोई पुख्ता तथ्य अब तक सामने नहीं आ सका है।

बता दें 9 जनवरी को उद्धव ठाकरे ने औरंगाबाद में साईं बाबा के कथित जन्म स्थान पाथरी शहर के लिए 100 करोड़ की विकास निधि देने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि, ‘परभणी जिले के नजदीक पाथरी गांव में साईं बाबा के जन्म स्थान पर 100 करोड़ के विकास काम करवाएंगे। पाथरी गांव में इस प्रोजेक्ट पर काम किया जाएगा।’ इसके बाद से ही शिरडी के लोग नाराज हो गए हैं। ये विवाद इतना बढ़ गया है कि मुख्यमंत्री के इस निर्णय के खिलाफ शिरडी बंद का किया ऐलान किया गया है। शिरडी साईं ट्रस्ट ने भी मंदिर को रविवार को अनिश्चितकालीन बंद करने की बात कही है। साथ ही इसका असर देशभर के दूसरे साईं मंदिरों पर भी पड़ सकता है, जहां हर गुरुवार को साईं भक्तों की भारी भीड़ जुटती है।

साईं मंदिर के पूर्व ट्रस्टी अशोक खांबेकर ने कहा कि, ‘साईंबाबा ने कभी भी अपने जन्म, धर्म पंथ के बारे में किसी को नहीं बताया। बाबा सर्वधर्मसमभाव के प्रतीक थे।’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘उद्धव ठाकरे गलत जानकरी दी गई है। मुख्यमंत्री पहले साईं सत चरित्र का अध्ययन करें और उसके बाद कोई फैसला लें।’

अशोक खांबेकर का कहना है कि, ‘इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी साईंबाबा के जन्मस्थान को लेकर ऐसा बयान दे चुके हैं। वह 1 अक्टूबर 2018 को साईं बाबा समाधि शताब्दी समारोह का उद्धघाटन करने आए थे। उस समय राष्ट्रपति ने भी कहा था कि पाथरी गांव साईं बाबा का जन्मस्थान है और इसके विकास के लिए मैं काम करूंगा। उस समय भी राष्ट्रपति के इस वक्तव्य का विरोध किया गया था।’

 

 

 

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