सिंगापुर में फेक न्यूज को रोकने का कानून बना, दोषी को 10 साल तक की कैद और करोड़ों रुपए का जुर्माना संभव

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चैतन्य भारत न्यूज

सिंगापुर। सिंगापुर की संसद ने दो दिन की बहस के बाद फेक न्यूज से निपटने के लिए बुधवार को एक कानून पारित कर दिया। इस कानून के मुताबिक अब फेक कंटेंट या न्यूज को ब्लॉक करने या हटाने का आदेश सरकार दे सकती है। इसमें सजा का प्रावधान भी किया गया है। इस कानून का उल्लंघन करने वाले को 10 साल की जेल और 3.77 करोड़ रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा। वर्कर्स पार्टी के नेता डानियल गोह ने फेसबुक पर बताया कि फेक न्यूज कानून बुधवार को 72-9 वोट से पारित हुआ। इसका नाम ‘ऑनलाइन फाल्सहुड एंड मैनीपुलेशन बिल’ है। केवल नौ सांसदों ने इसके खिलाफ वोट किया है।

हालांकि, इस कानून को दक्षिणपंथी समूहों, पत्रकारों और तकनीकी कंपनियों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि यह कानून अभिव्यक्ति की आजादी पर शिकंजा कसने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस कानून से ऑनलाइन न्यूज पोर्टल की स्वतंत्रता पर ‘हथौड़ा’ मारा गया है।

कानून मंत्री के. शणमुगम ने कहा कि फेक कंटेंट को ब्लॉक करने या हटाने का आदेश टेक कंपनियों को दिया जा सकेगा। इससे डरने की जरूरत नहीं है। इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होगी। गौरतलब है कि वर्ल्ड फ्रीडम इंडेक्स में शामिल 180 देशों में सिंगापुर का 151वां स्थान है।

इंटरनेशनल कमीशन फॉर जस्टिस के एशियाई क्षेत्र के डायरेक्टर फ्रेडरिक रॉस्की ने कहा कि इस कानून के तहत कई दंड प्रस्तावित किए गए हैं। इसका इस्तेमाल विचारों के मुक्त आदान-प्रदान और अभिव्यक्ति को कुचलने के लिए किया जा सकता है। जबकि सिंगापुर सरकार के मुताबिक यह वैश्विक वित्तीय हब है इसलिए वह फेक न्यूज की गिरफ्त में है।

मलेशिया में फेक न्यूज को लेकर कानून बना लेकिन पांच महीने में वापस

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली हसीन लूंग ने पिछले महीने कहा था कि फेक न्यूज कई देशों के लिए चिंता बना हुआ है। सिंगापुर में दो साल से इसके लिए कानून बनाने पर विचार किया जा रहा था। इस पर मलेशिया के प्रधानमंत्री महातीर मोहम्मद ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस कानून का उपयोग सत्ता में रहने के लिए भी किया जा सकता है। दक्षिण-पूर्व एशिया में मलेशिया पहला देश था, जिसने फेक न्यूज कानून लागू किया लेकिन पांच महीने में ही खत्म कर दिया गया। वहां नजीब रजाक सरकार ने मार्च 2018 में फेक न्यूज के खिलाफ कानून बनाया लेकिन चुनाव के बाद महातिर मोहम्मद की नई सरकार सत्ता में आई। इसने अगस्त 2018 में इस कानून को खत्म कर दिया।

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