अंधविश्वास की हद पार, दिव्यांगता ठीक करने के लिए बच्चों को जमीन में गाड़ा

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चैतन्य भारत न्यूज

गुलबर्गा. कर्नाटक के गुलबर्गा में अंधविश्वास को लेकर एक अजीब मामला सामने आया है। यहां ऐसा माना जाता है कि दिव्यांग बच्चों को जमीन में गर्दन तक गाड़ने से वे दिव्यांगता से बाहर आ जाते हैं।



जमीन में गड़े बच्चे की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं जो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रही है। तस्वीर में साफ दिख रहा है कि बच्चों के पूरे शरीर को जमीन में मिट्टी के अंदर गाड़ दिया गया है। उनका सिर्फ चेहरा दिख रहा है। हालांकि यह कोई पहला मामला नही है इससे पहले भी इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं।

बता दें बीते दिनों मध्यप्रदेश के इंदौर के चित्तौड़ा गांव में तालाब में डूबने से दो भाइयों की मौत के बाद ग्रामीणों ने पूरी रात उनके शव खड़े नमक में दबाकर रखे थे। परिजनों का मानना था कि डूबने से मौत के मामले में यदि शव को चार घंटे के लिए ही खड़े नमक में दबाकर रख दिया जाए तो नमक बदन का सारा पानी सोख लेगा और व्यक्ति फिर से जीवित हो जाएगा।

गौरतलब है कि आज 21वीं सदी में भी देश में अनेक लोग अंधविश्वास में यकीन करते हैं। ऐसे लोग अक्सर बाबाओं, साधुओं, तांत्रिकों के बहकावे में आकर अपना धन, जान और इज्जत गंवा बैठते हैं। यही नहीं उनके बहकावे में आकर लोग दूसरों की जान भी ले लेते हैं। एक तरफ देश जहां तेजी से विकास के पथ पर गतिमान है, वहीं अंधविश्वास की वजह से मासूम बच्चों और औरतों को जान से मारने के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

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