सोमवती अमावस्या पर 20 साल बाद बन रहा है ऐसा अद्भुत संयोग, जानिए शुभ-मुहूर्त और इसका महत्व

चैतन्य भारत न्यूज

भगवान शिव को समर्पित सावन मास का हर सोमवार बहुत खास होता है लेकिन इस बार सावन का तीसरा सोमवार ज्यादा फलदायी है क्योंकि 20 साल बाद सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। इसे हरियाली अमावस्या भी कहते हैं। इससे पहले 31 जुलाई 2000 में ऐसा संयोग बना था। इस अमावस्या पर शिवजी के साथ ही देवी पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय स्वामी और नंदी का विशेष पूजा की जाती है। इस बार सोमवती अमावस्या सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी, जाे कालसर्प दोष, अमावस्या दोष और पितृ दोष की शांति के लिए शुभ दिन होगा। सोमवती अमावस्या का स्नान, दान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु शिव पूजा, उपवास करेंगे। मंदिराें में भी विशेष शृंगार, पूजा, महाआरती हाेगी।

सोमवती अमावस्या तिथि मुहूर्त-

  • अमावस्या तिथि प्रारम्भ – 19 जुलाई 2020 को रात की 12:10 बजे से
  • अमावस्या तिथि समाप्त – 20 जुलाई 2020 को रात के 11:02 बजे तक

पाैधरोपण का शुभ दिन माना जाता है हरियाली अमावस्या

हरियाली के साथ सोमवती अमावस्या भी मनाई जाएगी। हरियाली अमावस्या को राशि-नक्षत्र अनुसार पौधे लगाने, उनकी सेवा करने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त हो जाता है। स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि का लाभ मिलता है। यह दिन पाैधे लगाने के लिए शुभ माना जाता है। इसके बाद पूरे मानसून पाैधे लगाने फलदायी हाेता है। महिलाओं को तुलसी की 108 बार परिक्रमा करनी चाहिये।

अमावस्या पर किया जाता है व्रत

जीवन साथी के सौभाग्य और अच्छे स्वास्थ्य के लिए महिलाएं व्रत करती हैं। हरियाली अमावस्या पर मां पार्वती की पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिल सकता है। विवाहित महिलाएं भी इस तिथि पर व्रत करती हैं और देवी मां की पूजा करती है। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन सुखी बना रहता है।

अमावस्या पर पितृ देवताओं की करें पूजा

अमावस्या तिथि पर घर के तर्पण, श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। परिवार के मृत सदस्यों को ही पितृ देवता कहा गया है। अमावस्या तिथि की दोपहर में पितरों के लिए धूप-ध्यान करना चाहिए। गाय के गोबर से बना कंडा जलाएं और उस पर पितरों का ध्यान करते हुए गुड़-घी अर्पित करें।

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