पितरों की शांति के लिए सोमवती अमावस्या पर इस तरह करें पूजा, जानें पूजा सामग्री और महत्त्व

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चैतन्य भारत न्यूज

सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इसे चैत्र अमावस्या के रूप में भी इसे जाना जाता है। यह हिंदूओं के लिए बेहद शुभ दिन माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह चैत्र के महीने में आती है। हालांकि, इस वर्ष अमावस्या 11 अप्रैल, रविवार से शुरू होकर 12 अप्रैल, सोमवार तक चलेगी। इस दिन भक्त भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन लोग पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान व तर्पण करते हैं। कहा जाता है कि इस दान का फल दोगुना मिलता है।

सोमवती अमावस्या पूजन सामग्री-

पुष्प, माला, अक्षत, चंदन, कलश, दीपक, घी, धूप, रोली, भोग के लिए मिठाई, धागा, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, सुपारी, पान के पत्ते, मूंगफली 108 की संख्या में (जिससे परिक्रमा आसानी से पूरी हो जाए)।

सोमवती अमावस्या की पूजा-विधि

  • सोमवती अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, जलाशय या कुंड में स्नान करें।
  • सूर्योदय के समय भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित जरूर करें।
  • इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत भी रखते हैं।
  • इसके बाद अपने पितरों को याद करते हुए उनके नाम पर ब्राह्मणों को खाना खिलाएं।
  • वहीं पितरों के स्थान पर देसी घी का दीप जलाए।
  • इसके बाद ब्राह्मण भोजन कराने के बाद प्रसाद के रूप में परिवार के साथ ग्रहण करें।
  • इस दिन मौन व्रत रहने सर्वश्रेष्ठ फल मिलता है।

पितरों की तिथि है चैत्र अमावस्या, जानिए व्रत का महत्व और पूजा-विधि

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