मानवता हुई शर्मसार : कैंसर मरीजों की मौत के बाद सड़क हादसा बता क्लेम वसूलने वाला गिरोह पकड़ा गया 

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चैतन्य भारत न्यूज

सोनीपत. पैसों के लिए इंसान किसी भी हद तक गुजर सकता है ये सोनीपत के एक हैरान कर देने वाले मामले से साबित हो गया है। हाल ही में यहां से मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) की सोनीपत टीम ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो कैंसर पीड़ितों का पता लगाकर उनका बीमा कराता था। फिर उनकी मौत होने के बाद उसे सड़क दुर्घटना में मृत दिखाकर मृतक के परिवार के साथ मिलकर क्लेम के लाखों रुपए ऐंठता था।

खुलासे के दौरान एसटीएफ भी ये जानकर हैरान रह गए कि, यह गिरोह मरीज की मौत होते ही उसके परिजनों की इजाजत लेकर शव को गाड़ियों से कुचल देते थे और इस तरह वे बीमा कंपनियों से रूपए ऐंठ लेते थे। इस हैवानियतभरे काम में में गिरोह के साथ डॉक्टरों से लेकर पुलिसवाले तक उनकी उनकी मदद करते थे। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए गिरोह के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया है और वे उनसे पूछताछ में जुट गई हैं।

एसटीएफ टीम ने बताया कि, उन्होंने इस गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ा है। कैंसर मरीजों की मौत के बाद उन्हें कुचलकर फाइल में सड़क हादसा दिखाने के बाद गिरोह पीजीआइ रोहतक से इलाज के रिकॉर्ड की भी सभी फाइल गायब करवा देता था जिससे कि ये मामला पकड़ में ना आ सके। पुलिस की गिरफ्त में इस गिरोह का सरगना पवन भौरिया आया है। पवन गांव सेवली का रहने वाला है जो पेशे से वकील है। पवन के अलावा ग्राम रिढाना निवासी मोहित और ग्राम गुमाना निवासी विकास भी पकड़ में आए हैं।

ये गिरोह पीजीआइ रोहतक से कैंसर के मरीजों का डाटा निकालकर उन मरीजों की तलाश करते थे। इसके बाद गिरोह के सदस्य मरीज के परिवारवालों से संपर्क कर उन्हें बीमा के रुपए दिलवाने का लालच देते थे। ये लोग मरीज की बीमारी छुपाकर कई कंपनियों में एक-साथ बीमा करवाते थे। मरीज के मरने के बाद वे शव को कहीं ले जाकर उसे गाड़ी से कुचल देते थे। फिर वे संबंधित थाने में उस सड़क दुर्घटना की रिपोर्ट दर्ज करवा देते। इसके बाद गिरोह डॉक्टरों की मदद से पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करवा लेते थे। फिर वे रिपोर्ट की मदद से बीमा कंपनियों से उसका क्लेम लेते थे। अब तक एसटीएफ के पास ऐसे आठ मामलों की सूची है जिनमे आरोपित पुलिसकर्मी और डॉक्टरों के साथ मिलकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करवाते थे। जब कंपनी के पास बार-बार इस तरह के क्लेम आए तो उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया तो यह सनसनीखेज जानकारी सामने आई।

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