5 साल से कम उम्र के एक-तिहाई बच्चे कुपोषण का शिकार, ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 102वें स्थान पर

kuposhan

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. यूनिसेफ ने अपनी नई रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार, पांच साल से कम उम्र के 70 करोड़ बच्चों में प्रत्येक तीन में से एक बच्चा कुपोषण या मोटापे का शिकार है। ऐसे में दुनियाभर में कुपोषित आहार के परिणामों के प्रति लोगों को सतर्क कर दिया है। यह रिपोर्ट मंगलवार को जारी की गई, जिसमें यह बताया गया कि, दुनिया में 80 करोड़ से ज्यादा आबादी भुखमरी से पीड़ित है।



रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि, दुनियाभर में करोड़ों बच्चे अपनी जरूरत से बहुत कम खाना खाते हैं और जिन्हें जरूरत नहीं होती है वो अत्यधिक मात्रा में खाते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, ‘दुनियाभर में बीमारियां फैलने के पीछे अब मुख्य खतरा खराब आहार है।’ यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिटा फोरे ने ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड चिल्ड्रन’ नामक एक रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा कि, ‘इंसान स्वस्थ रहने के लिए बेहतर खानपान की लड़ाई हार रहा है।’

साल 1999 के बाद आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में से करीब आधे बच्चों को आवश्यक विटामिन और खनिज नहीं मिल पा रहे हैं। पिछले तीन दशकों में बच्चों में कुपोषण का एक और रूप मोटापे के तौर पर सामने आया है। यूनिसेफ के मुताबिक, इनमें से कई बच्चों पर दिमाग के अल्प विकास, याद करने में परेशानी, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता और संक्रमण तथा बीमारियों का खतरा है।

यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2018 में विश्वभर में 5 साल से कम उम्र के 14.9 करोड़ बच्चे अविकसित और लगभग पांच करोड़ बच्चे कमजोर थे। ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ यानी जीएचआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार भारत और नीचे गिरकर 102वें रैंक पर आ गया है। इस बार सूची में कुल 117 देश ही हैं। इस लिस्ट में पाकिस्तान 94वें स्थान पर है। बता दें ग्लोबल हंगर इंडेक्स चार पैमानों कुपोषण, शिशु मृत्यु दर, चाइल्ड वेस्टिंग और बच्चों की वृद्धि में रोक पर देशों को परखता है।

ये भी पढ़े…

विश्व खाद्य दिवस : दुनिया में भूखे लोगों की एक चौथाई आबादी भारत में, भूख और गरीबी के खिलाफ अब भी जंग जारी

15-19 साल की 40% महिलाएं और 20-24 साल की 30% महिलाएं प्रेग्नेंसी में होती हैं कमजोर, बच्चे पर भी पड़ता है असर

रिपोर्ट : 10 साल से जंक फूड खा रहा था किशोर, चली गईं आंखें, सुनना भी कम हुआ

Related posts