बीएचयू : संस्कृत के मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति पर छात्रों का विरोध, छलका फिरोज खान और उनके पिता का दर्द

चैतन्य भारत न्यूज

वाराणसी. ‘मैं एक मुस्लिम हूं तो क्या मैं संस्कृत छात्रों को सिखा नहीं सकता?’ यह सवाल है बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग के पहले मुस्लिम प्रोफेसर डॉ. फिरोज खान का। दरअसल फिरोज खान को संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किए जाने को लेकर पिछले करीब दस दिनों से विवाद चल रहा है, जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। छात्रों का यह विरोध अब धीरे-धीरे सोशल मीडिया तक पहुंच चुका है। #BHU_में_फिरोज_क्यों हैशटैग भी ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगा है। यूनिवर्सिटी के छात्रों का कहना है कि, संस्कृत के लिए मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति करना गलत है। यह हिंदू धर्म का अपमान है।



 

10 उम्मीदवारों में फिरोज खान चयनित

बता दें बीएचयू के संस्कृत विभाग के सहायक प्रोफेसर के पद के लिए 10 उम्मीदवारों को चुना गया था। इनमें सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाले फिरोज खान की नियुक्ति की गई। जयपुर जिले के बगरू निवासी फिरोज खान राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद बीएचयू में सहायक प्रोफेसर बने। उन्होंने कहा कि, ‘हिंदुस्तान में मुझे अपने धर्म के कारण कभी किसी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। छात्रों का एक समूह नहीं चाहता कि मैं उन्हें संस्कृत सिखाऊं क्योंकि मैं हिंदू नहीं हूं।’ फिरोज खान ने बताया कि, संस्कृत से उनका खानदानी नाता है। उन्होंने कहा, ‘मेरे दादा गफूर खान राजस्थान में हिंदू देवी-देवताओं को लेकर भजन गाकर इतने मशहूर थे कि लोग उनको दूर-दूर से बुलाने आते थे। मेरे पिता भी दादा के पदचिह्नों पर चलकर संस्कृत की पढ़ाई करने के साथ जयपुर में एक गोशाला के लिए प्रचार-प्रसार करने के साथ गो-सेवा का महत्व बताते थे। हमें उस समय न अपने दादा से कोई समस्या थी न पिता से फिर मुझे बीएचयू में संस्कृत पढ़ाने में क्या समस्या होगी।’

पिता का छलका दर्द 

फिरोज खान को लेकर हो रहे विवाद से उनके परिजन चिंतित हैैं कि कहीं उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं हो जाए। विवाद को देखते हुए फिरोज खान के पिता रमजान खान का भी दर्द छलका। उन्होंने कहा कि, ‘हमने बड़े अरमान से फिरोज को संस्कृत की पढ़ाई कराई थी। इस स्तर पर पहुंचकर भी कुछ लोगों के विरोध के चलते बेटे का भविष्य दांव पर लगा दिख रहा है। अब लगता है कि मैैं बेटे को संस्कृति की तालीम दिलाने के बजाय मुर्गे की दुकान खुलवा देता तो अच्छा रहता है। तब लोगों को आपत्ति नहीं होती।’ बता दें फिरोज का पूरा परिवार संगीत में दिलचस्पी रखता है। उनके पिता भजन-कीर्तन करते हैं।

बीएचयू प्रशासन को धन्यवाद कहा

जानकारी के मुताबिक, उनका परिवार अब तक आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। अब जब उनके अच्छे दिनों की शुरुआत हुई तो फिरोज खान के महजब को लेकर बहस छिड़ गई। उनके पिता ने कहा कि, उन्होंने कभी मजहब के आधार पर बच्चों को भाषा में फर्क करना नहीं सिखाया। कोई हिदू-मुस्लिम में भेद नहीं करता, यही वजह रही कि संस्कृत में शिक्षा लेकर फिरोज अपनी योग्यता से बीएचयू तक पहुंचा। यह हमारे लिए फक्र की बात है कि बीएचयू में उसका चयन हो गया।’ उन्होंने आग्रह करते हुए कहा कि, ‘मैं विरोध करने वालों से कहूंगा कि उन्हें एक बार मंथन जरूर करना चाहिए।’ साथ ही रमजान खान ने फिरोज खान का चयन करने पर बीएचयू प्रशासन को धन्यवाद भी कहा।

10 दिनों से बीएचयू में विरोध

बता दें फिरोज खान को लेकर 7 नवंबर से कुलपति आवास के बाहर छात्र धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों ने धरने के दौरान ‘मिर्ची हवन’, बुद्धि-शुद्धि यज्ञ, रुद्राभिषेक के बाद सोमवार को हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ भी किया। छात्र नियुक्ति को महामना के आदर्शों और नियमों के विपरीत बताते हुए इसे रद्द करने की मांग पर अड़े हैं। वहीं इस बारे में बीएचयू प्रशासन का कहना है कि, ‘चयन समिति सभी को मौका देती है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो।’ बता दें छात्रों ने कहा है कि, जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हो जाती तब तक विरोध जारी रहेगा।

ये भी पढ़े…

अश्लील कमेंट करने वाले प्रोफेसर की बर्खास्तगी की मांग करते हुए छात्र-छात्राओं का धरना जारी

दिल्लीः जेएनयू से बाहर आया फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन, गुस्साए छात्रों ने किया जमकर हंगामा

जेएनयू : छात्रों के प्रदर्शन के आगे झुकी सरकार, जानें पहले क्या थी और अब कितनी बढ़ी फीस?

Related posts