14 साल जेल में बिताने के बाद भी नहीं छोड़ी जिद, बाहर आकर किया डॉक्टर बनने का सपना पूरा

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चैतन्य भारत न्यूज

कलबुर्गी. कहते हैं कि सपने उन्हीं के साकार होते हैं जो पूरी शिद्दत के साथ अपने सपनों को उड़ान देने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कर्नाटक के कलबुर्गी के सुभाष पाटिल ने। उन्होंने साबित किया है कि सपना पूरा करने और जीवन को नए सिरे से शुरू करने में कभी भी देरी नहीं होती है। 14 साल जेल में काटने के बाद उन्होंने डॉक्टर बनने का अपना सपना साकार कर लिया है।



हत्या के मामले में हुई थी जेल

सुभाष पाटिल की उम्र 39 साल है और उनका कहना है कि उन्होंने साल 1997 में एमबीबीएस जॉइन किया था, लेकिन 2002 में उन्हें हत्या के एक मामले में 14 साल के लिए जेल में डाल दिया गया। हालांकि जेल में रहते हुए भी सुभाष ने ओपीडी में काम किया। जेल से बाहर आने के बाद सुभाष ने 2019 में अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। सुभाष कहते हैं कि लोग परिस्थितियों के कारण जेल में आते हैं, लेकिन यह एक अच्छा जीवन जीने का अंत नहीं हो सकता और हमारे अच्छे समय की वापसी हमेशा संभव है।

जेल में भी मिल चुका सम्मान

नवंबर 2002 में सुभाष को एक कत्ल के आरोप में बंगलुरु पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस समय सुभाष कलबुर्गी में एमआर मेडिकल कॉलेज में तीसरे वर्ष के  छात्र थे। जिस शख्स की हत्या की गई उसकी पत्नी और सुभाष की प्रेमिका को भी इस मामले में सजा हुई। दोनों को 2016 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अच्छे आचरण के लिए रिहा कर दिया गया। खबरों के मुताबिक, जेल में रहते हुए सुभाष पाटिल केंद्रीय जेल अस्पताल में डॉक्टरों की मदद करते थे और उन्हें तपेदिक (टीबी) से पीड़ित कैदियों के इलाज में योगदान देने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा साल 2008 में सम्मानित भी किया जा चुका है।

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