इन टिप्स के जरिए जानें खुद पर कैसे करें भरोसा

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चैतन्य भारत न्यूज

जिंदगी में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब हमें लगता है अब सब कुछ खत्म हो गया। अब हम आगे कुछ नहीं कर पाएंगे या फिर ऐसा लगता है मानों हाथ पैर चलना बंद हो गए हो जैसे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया है। कहीं आप अपने साथ कुछ गलत तो नहीं कर रहे हो।?



जरा सोचिए जब कुछ दिन पहले आप ही ने अपने ऑफिस वाले दोस्त को हौसला दिया था जब वह आपकी ही जैसी स्थिति से गुजर रहा था। तब आप ही थे जब आपने उसे बताया था कि वह काबिल और इन परिस्थितियां से लड़ सकता है। जब उसने लड़ना शुरू किया तो चंद दिनों बाद परिस्थितियां बदल गई और सब कुछ ठीक हो गया। तो भला फिर क्यों आप अपने ही दुश्मन बन बैठे हो या फिर आप खुद को समझ नहीं पा रहे हो? जब खुद का आत्मविश्वास डगमगाने लगे और खुद से यकीं उठने लगे तो समझ लीजिए आपने अपने आप से सवांद करना बंद कर दिया है। आइए जानते हैं जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जिनके जरिए हम गिरकर संभल सकते हैं।

खुद का साहस बांधना जरुरी

मशहूर मनोवैज्ञानिक और लेखक डेविड श्वार्ट्ज ने अपनी किताब ‘द मैजिक ऑफ थिंकिंग बिग’ में लिखा कि, सबसे पहले आप अपने दोस्त बनिए, जब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, समय खराब चल रहा हो। ऐसे में आप खुद से प्यार करें, खुद का दुलार करें और खुद से बात करें। क्योंकि खुद का साहस बांधना बहुत जरुरी है। आध्यात्मिक गुरु यू. जी. कृष्णमूर्ति कहते थे कि जब आपको जरुरत हो तो सबसे पहले अपने आपको याद कीजिए, फिर दूसरों को आवाज दीजिए। क्योंकि अगर आप खुद सोए हुए हैं और आपको नहीं पता कि आपकी दिक्कत क्या है तो दूसरों से मदद मांग कर आप कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे।

खुद से कुछ न छिपाएं

अब आप सोच रहे होंगे कि, यह कैसा सवाल है। भला हम अपने आप से क्या छुपा सकते हैं? दरअसल आप कुछ सवालों का सामना करने से डरते हैं। यही वजह है कि आपका खुद से भरोसा उठता जा रहा है। आपको पता होना चाहिए आप क्या है, आप कौन है?, आपकी सीमाएं क्या है? उसी दायरे में रहकर समस्या का हल ढूंढे। अगर कोई दूसरा बनकर ढूढेंगे तो कभी काम नहीं बन पाएगा।

खुद को बताएं कमजोर नहीं हैं आप

कहीं बार-बार आप अपने आपको जज तो नहीं कर रहे हो। ओशो के मुताबिक, हम सभी अपने साथ एक गलती है करते हैं, वो है खुद को बार-बार जज करना। अगर आप ऐसा करेंगे तो यही लगेगा कि आप दूसरों से कमजोर है।

हमेशा बच्चा बना रहे, लेकिन सोचे अभिभावक की तरह

जब बच्चा आपसे कोई समस्या का हल मांगते हैं तो आप उन्हें ऐसी भी सलाह देते हैं जिन पर आप खुद यकीं नहीं कर पाते हैं। ठीक इसी तरह अपने आप को जांचते समय बच्चा बनिए और अभिभावकों की तरह खुद का हौसला बढ़ाएं। जैसे कि अगर बच्चा फैल हो जाए तो आप उसे ये तो नहीं कहेंगे कि तो घर से निकला जा। तो फिर अपने आप को इतनी बड़ा सजा क्यों? आपका भरोसा तभी वापस आएगा जब आपको यह महसूस होगा कि आपको कोई सही तरीका से गाइड कर रहा है। जरुरी है कि आप अपने अंदर यह परिपक्वता लाएं।

मेरे लिए क्या सही है?

इसका सही जवाब ढूढ़ने की कोशिश कीजिए। कई बार हमें ऐसा लगता है कि हम गलत कर रहे हैं, तो गलतियों से डरना छोड़िए। तभी आप एक सही निर्णय ले पाएंगे। खुद के प्रति ईमानदार बनिए यही ईमानदारी कभी आपका आत्मविश्वास कम नहीं होने देगी। भले ही दुनिया आपका भरोसा तोड़े आपको खुद अपना भरोसा नहीं तोड़ना है।

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