सूडान: खाने की कमी से हड्डियों का ढांचा बने शेर, बचाने के लिए आम लोगों ने शुरू की मुहिम

sudan lion

चैतन्य भारत न्यूज

खार्तूम. सूडान के एक चिड़ियाघर में जंगल के राजा शेर की इतनी बुरी हालत देखने को मिली है जो चिंता का विषय बन गई है। राजधानी खार्तूम में स्थित अल-कुरैशी चिड़ियाघर से सामने आई तस्वीरों में शेर की हालत आवारा जीव-जंतुओं से भी बद्तर नजर आ रही है। तस्वीरें वायरल होने के बाद कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने शेरों की ऐसी हालत देख आवाज उठाई है।



अफ्रीकी देश सूडान में खाने और दवाओं की कमी का असर इंसानों के साथ-साथ जानवरों पर भी पड़ने लगा है। इस चिड़ियाघर में कमी का असर ऐसा पड़ा कि यहां 5 नर और मादा शेर कुपोषण का शिकार हो गए। इन्हें न तो खाने को मिल रहा और न ही इनकी ठीक से देखभाल की जा रही है। आलम यह है कि उनकी हड्डियां तक झलकने लगी हैं। जानकारी के मुताबिक, इनका वजन शेरों के औसत वजन से दो-तिहाई तक कम हो चुका है।

पिंजड़ों में कैद इन शेरों की हालत इतनी ज्यादा खराब हो चुकी है कि ये अच्छे से चल भी नहीं पा रहे। इनके शरीर में इतनी भी ताकत नहीं बची है कि खुद को साफ-सुथरी जगह ले जा सके। इन कुपोषित और कमजोर शेरों को बचाने के लिए दुनियाभर में ऑनलाइन मुहिम छेड़ी जा रही है।

सूडान में ‘सूडान एनिमल रेस्क्यू’ हैशटैग ट्रेंड हो रहा है। उस्मान सालिह नामक एक एक्टिविस्ट ने पोस्ट में लिखा है कि, ‘जब मैंने इन शेरों को पार्क में देखा, तो उनकी हड्डियां शरीर से बाहर झांक रही थीं। मैं मददगार लोगों और संस्थानों से इनकी मदद की अपील करता हूं।’ उनके इस पोस्ट के बाद से ही लोगों ने मांग की है कि शेरों को किसी ऐसी जगह भेजा जाए, जहां इनका पालन-पोषण ठीक ढंग से हो सके।

जानकारी के मुताबिक, अल-कुरैशी चिड़ियाघर की देखरेख खार्तूम नगरपालिका करती है। पार्क के अधिकारियों ने कहा कि, ‘चिड़ियाघर की खराब हालत से ही ज्यादातर जानवरों की सेहत पर असर पड़ा। पिछले कुछ हफ्तों में शेरों की स्थिति खराब हो गई है। उनके शरीर के वजन का लगभग दो-तिहाई कम हो गया है। उन्हें खाना हमेशा उपलब्ध नहीं होता है। अक्सर हम ही इन्हें अपने पैसे से खाना खरीदकर खिलाते हैं।’

सोशल मीडिया पर शेरों की हालत बिगड़ती देख रविवार को भारी संख्या में लोग चिड़ियाघर पहुंचे। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, एक शेर को रस्सी से बांधा गया और उसे ड्रिप के जरिए ग्लूकोज भी दिया गया। उसे डिहाइड्रेशन हुआ था। उनके बाड़ों के पास खराब मीट के टुकड़े पड़े थे।

बता दें पिछले काफी समय से सूडान की अर्थव्यवस्था बेहद खराब है। विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की कगार पर है। खाने-पीने के दाम भी आसमान छू रहे हैं। इस वजह से चिड़ियाघर प्रबंधन भी जानवरों की देखरेख ठीक से नहीं कर पा रहा है।

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