गोल्डन बाबा का लंबी बीमारी के बाद निधन, 20 किलो सोने के आभूषण पहन गए थे कांवड़ यात्रा पर

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. प्रसिद्द गोल्डन बाबा उर्फ सुधीर कुमार मक्कड़ का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वह पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर इलाके में रहते थे। गोल्डन बाबा ने एम्स अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह गाजियाबाद के रहने वाले थे। संन्यासी बनने से पहले गोल्डन बाबा का दिल्ली में गारमेंट्स का कारोबार था। लेकिन ऐसा कहा जाता है कि अपने पापों को प्रायश्चित करने के लिए वो संन्यासी बन गए।

20 किलो सोना पहनकर गए थे कांवड़ यात्रा पर

सुधीर कुमार मक्कड़ को सोने के आभूषणों का बहुत शौक था। गोल्डन बाबा 20 किलो स्वर्ण आभूषण और 21 लग्जरी कारों के साथ कांवड़ यात्रा पर गए थे। इसकी हर तरफ चर्चा हुई थी। हिस्ट्रीशीटर बदमाश से संत बने गोल्डन बाबा दिल्ली और यूपी में काफी चर्चित रहे हैं। उनके पास करोड़ों रुपए के सोने के आभूषण थे। करोड़ों के आभूषण की सुरक्षा के लिए गोल्डन बाबा अपने साथ निजी सुरक्षागार्डों की फौज रखा करते थे। दिल्ली और यूपी के अलावा उत्तराखंड में भी वे मशहूर थे।

बदमाशों के बीच थे पॉपुलर

राजधानी दिल्ली में लॉटरी लगाना हो या सट्टा खेलना हो, लोग गोल्डन बाबा के पास पहुंचते थे। बताया जाता है कि दिल्ली के कई चर्चित बदमाशों की ऐसी आस्था थी कि गोल्डन बाबा के आशीर्वाद से उनकी किस्मत खुल जाएगी। दिल्ली पुलिस के थानों में दर्जनों मामले उसके खिलाफ दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड में वो बीसी (BAD CHARACTER) थे, यानी उस इलाके का माहिर बदमाश। उनके खिलाफ दर्जनों अपहरण, फिरौती मांगने, जबरन धन उगाही जैसे आरोपों से जुड़े करीब 35 से ज्यादा मामले दर्ज थे। दिल्ली पुलिस के अधिकारी ये भी बताते हैं कि साल 2007 में सुधीर कुमार मक्कड़ के खिलाफ एक शख्स के अपहरण करने के बाद 25 लाख रुपए की फिरौती भी मांगने का आरोप था। दिल्ली की कई अदालतों में भी गोल्डन बाबा के नाम से मामले चल रहे हैं।

क्यों कहा जाता है गोल्डन बाबा

गोल्डन बाबा अपनी युवावस्था में अक्सर सावन में दोस्तों के साथ हरिद्वार जाया करते थे। लाखों-करोड़ों के जेवर पहन और पूरा सज-धज कर जल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाने का उनका शौक था। गोल्डन बाबा को 1972 से ही सोना पहनना पसंद था। वह सोने को अपना ईष्ट देवता मानते थे। बाबा की दसों उंगलियों में सोने की अंगूठी, बाजुबंद, सोना का लॉकेट रहता था।

 

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