कोरोना संकट: आजादी के बाद पहली बार सुप्रीम कोर्ट में ड्रेसकोड बदला, अब बिना गाउन-काेट पहले सुनवाई करेंगे वकील

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के ड्रेस कोड में भी बदलाव किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक औपचारिक अधिसूचना जारी कर सभी वकीलों से कहा है कि, वे कोविड-19 महामारी के मद्देनजर अगले आदेश तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान कोट और लंबे गाउन न पहनें।

महिला वकीलों के लिए यह है ड्रेस कोड

कोरोना वायरस ने न्यायपालिका को भी कामकाज के तरीके के साथ ड्रेस कोड बदलने पर मजबूर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने शाम को एक सर्कुलर में कहा कि, कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए ड्रेस कोड में बदलाव की यह व्यवस्था की गई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के दौरान अगले आदेश तक वकील काला कोट और गाउन नहीं पहनेंगे। महिला वकील सफेद सलवार सूट या सफेद साड़ी पहनेंगी, उसके ऊपर वे काला कोट और गाउन नहीं पहनेंगी।

कोरोना संक्रमण रोकने के लिए रोजाना कपड़े धोना जरूरी

चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि कोरोना संकट बने रहने तक के लिए नए ड्रेस कोड का आदेश जारी करेंगे। देर शाम वकीलों और जजों के लिए नया ड्रेस काेड जारी कर दिया गया। बता दें इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के स्टाफ को 24 अप्रैल को ही कोट पहनने से मना कर दिया गया था। दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिए पहने जाने वाले कपड़ों को रोजाना धोना बहुत जरूरी है। लेकिन कोट और टाई को रोजाना धोना संभव नहीं है। इसलिए वकीलों के ड्रेस कोड से फिलहाल कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए कोर्ट और टाई को हटा दिया गया है।

आजादी के बाद न्यायपालिका में पहली बार ऐसा बदलाव हो रहा

बता दें देश की आजादी के बाद न्यायपालिका में पहली बार ऐसा बदलाव हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बीएस चौहान ने बताया कि, संविधान में ऐसा प्रावधान है कि अपरिहार्य परिस्थितियों या डॉक्टर की सलाह पर ड्रेस कोड में छूट दी जा सकती है।

Related posts