महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश की अनुमति दिलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, कोर्ट ने जारी किए नोटिस

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली। मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति देने को लेकर दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, केंद्रीय वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है। जस्टिस एसए बोबड़े व जस्टिस अब्दुल नजीर की सदस्यता वाली बेंच ने नोटिस जारी करते हुए याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वे इस मामले में सिर्फ सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण विचार करेंगे। याचिका पुणे की मुस्लिम दंपति यास्मीन जुबेर अहमद पीरजादा और जुबेर अहमद नजीर अहमद पीरजादा ने दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि यह प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 (समानता- लैंगिक भेदभाव पर रोक) 21 (जीवन का अधिकार) 25 (धर्म की स्वतंत्रता) व 29 (संस्कृति के संरक्षण) के आधार पर असंवैधानिक है। याचिका में बताया गया है कि पवित्र कुरान महिला से भेदभाव नहीं करता। ऐसा कहीं नहीं मिलता कि पैगंबर ने भी महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश या नमाज का विरोध किया हो।

पवित्र कुरान, मक्का और पैगंबर का हवाला दिया

  • महिलाओं को जमात-ए-इस्लामी और मुजाहिद संप्रदायों के तहत मस्जिद में नमाज की अनुमति है जबकि सुन्नी समुदाय की मस्जिदों में रोक है।
  • जिन मस्जिदों में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति है, वहां पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार व जगह हैं।
  • पवित्र शहर मक्का में भी भेदभाव नहीं है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि मुंबई की हाजी अली की दरगाह पर तो महिलाओं को जाने की अनुमति है। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि कुछ जगहों पर अब भी प्रतिबंध है। जस्टिस नजीर ने पूछा कि इस बारे में मक्का-मदीना में क्या नियम हैं? इसके बाद याचिकाकर्ता ने कनाडा की एक मस्जिद का भी हवाला दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबड़े ने ने कई सवाल किए मसलन – क्या मौलिक संवैधानिक समानता किसी विशेष संस्था पर लागू होती है? क्या मंदिर और मस्जिद सरकार के हैं? इन्हें थर्ड पार्टी चलाती है। जैसे आपके घर मे कोई आना चाहे तो आपकी इजाजत जरूरी है, अब इसमें सरकार क्या कर सकती है? याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पुरुषों की ही तरह महिलाओं को भी अपनी धार्मिक मान्यता के आधार पर प्रार्थना का अधिकार है।

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