पेड़ों की कटाई: SC की सरकारी अफसरों को फटकार- हमें पता है आपके पास इतना दिमाग नहीं कि पर्यावरण को बचा सकें

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चैतन्य भारत न्यूज 

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-112 को चौड़ा करने और उस पर रेल ओवरब्रिजों के निर्माण के लिए 356 पेड़ों को काटने की जरूरत बताई गई थी। इसके खिलाफ एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स ने आवाज उठाई और याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अनोखा सुझाव दिया है।




इन रेलवे लाइनों के पास लगभग 800 मौतें होने के कारण सरकार ने ओवरब्रिज बनाने का फैसला लिया था। इसके लिए 356 पेड़ों को काटा जाना है। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स ने पहले पेड़ों की कटाई के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें पेड़ काटने की इजाजत दे दी। फिर एनजीओ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि, ‘हम चाहते हैं कि सभी पर्यावरणविद, अर्थशास्त्री और वैज्ञानिक यह देखें कि अपने पूरे जीवनकाल में एक पेड़ हमें कितनी ऑक्सीजन देता है। इसी के आधार पर पेड़ की कीमत का आंकलन किया जाना चाहिए। यह कीमत उस प्रोजेक्ट की कीमत में भी शामिल होना चाहिए, जिसमें पेड़ों को काटने की जरूरत पड़ती है। हमारे अनुसार यही सबसे बेहतर समाधान है।’

सरकारी अधिकारियों को फटकार लगाई

चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकारी अधिकारियों को फटकार भी लगाई और कहा कि, ‘हमें पता है कि आपके पास इतना दिमाग ही नहीं है कि आप पर्यावरण को बचाने के लिए सही फैसले ले सकें। इसलिए कम से कम बचे हुए पेड़ों को तो मत काटिये। पेड़ों को काटे बिना रास्ता बनाने का कोई तरीका हो सकता है? यह थोड़ा अधिक महंगा हो सकता है, लेकिन यदि आप संपत्ति को महत्व देते हैं, तो यह समाधान ही सबसे बेहतर होगा।’ साथ ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गठित की गई कमेटी को रिपोर्ट दायर करने के लिए अतिरिक्त समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 4 हफ्ते के लिए टाल दी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पहले हुई सुनवाई में कहा था कि, ‘अब समय आ गया है कि पेड़ों द्वारा दी जाने वाली ऑक्सीजन का आंकलन किया जाए। किसी भी प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों को काटने का अनुमान तो लगा लिया जाता है, लेकिन अब से पेड़ों की कीमत जीवनभर उनके द्वारा दिए गए ऑक्सीजन की कीमत के आधार पर होना चाहिए।’

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