सेना की महिला अफसरों को सुप्रीम कोर्ट ने परमानेंट कमीशन देने को कहा, जानें सेना में महिलाओं की क्या है स्थिति

women in army

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. सेना की जिन 8 महिला अफसरों की याचिका पर केंद्र सरकार ने महिलाओं को सेना में परमानेंट कमीशन देने पर विचार किया, उन्हें ही इसके लाभ से वंचित कर दिया गया है। जब इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को मिली तो उन्होंने सरकार को सख्त लहजे में चेताया कि वह सेना में महिलाओं के कमीशन पर जल्द फैसला ले। कोर्ट ने यह भी कहा कि, वह चाहे तो आदेश पास कर सकती है, लेकिन वह इसका श्रेय लेने का मौका सरकार को दे रही है।



जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि, इसी साल मार्च से पहले से शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के तहत सेना में भर्ती होने वाली महिला अधिकारियों को सरकार परमानेंट कमीशन देने पर विचार करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि, सेना में कार्यरत महिलाओं को इसमें शामिल करने से भारत की अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग ही छवि बन जाएगी। बता दें दिल्ली हाई कोर्ट ने सेना की महिला अधिकारियों की याचिका पर मार्च 2010 में उन्हें परमानेंट कमीशन देने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि, सरकार 28 नवंबर को इस मामले पर अपना सकारात्मक पक्ष लेकर आएं।

जिन महिलाओं ने लड़ाई लड़ी, उन्हें नहीं मिला लाभ

दरअसल, फरवरी, 2019 में सेना की 10 शाखाओं में महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने का फैसला लिया था। महिला अधिकारियों की वकील एश्र्वर्या भट्टी ने कोर्ट से कहा था कि, ‘जिस अवधि से महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने का फैसला किया गया है, उससे उन महिला अधिकारियों को लाभ नहीं मिलेगा, जिन्होंने इसके लिए लड़ाई लड़ी थी।’

54 की उम्र तक सेवाएं दे सकेंगी महिलाएं

सेना में एसएससी के तहत रिक्रूट हुईं महिला अधिकारियों को परमानेंट कमिशन ऑफर करने के लिए अलग काडर बनाने पर कुछ समय से विचार चल रहा है। इसके लिए अलग काडर बनाया जा सकता है ताकि महिलाओं को लड़ाकू भूमिका छोड़कर बाकी भूमिकाओं में परमानेंट कमिशन दिया जा सके। एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, अभी एसएससी के तहत आए पुरुष अधिकारियों को 10 साल पूरे होने पर परमानेंट कमिशन ऑफर किया जाता है। लेकिन महिला अधिकारियों को सिर्फ लीगल ब्रांच और आर्मी एजुकेशन कोर में ही परमानेंट कमिशन ऑफर किया जाता है। सेना में भर्ती हुईं महिलाएं बॉर्डर पर नहीं बल्कि चिकित्सा, शिक्षा, कानून, सिग्नल, इंजीनियरिंग विभागों में काम कर रही हैं। अभी तक सेना के सभी 10 विभागों में महिलाएं एसएससी के जरिए आती थीं। परमानेंट सर्विस कमिशन मिलने के बाद महिलाएं सेना में 54 साल की उम्र तक अपनी सेवाएं दे सकेंगी।

क्या है शॉर्ट सर्विस कमीशन

शार्ट सर्विस कमीशन के तहत एक महिला अधिकारी 10-14 साल तक ही काम कर सकती है। महिला अधिकारियों को सेना सेवा कॉर्प्स, युद्ध सामग्री(आर्डनेंस), शिक्षा कॉर्प्स, न्यायाधीश, महाधिवक्ता, अभियंता, सिगनल्स, खुफिया और इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल इंजीनियरिंग शाखाओं में शामिल होने की अनुमति मिलती है। अभी महिलाओं के पास लड़ाकू भूमिका जैसे पैदलसेना, मशीनीकृत पैदल सेना, विमान और तोपखाने में शामिल होने का विकल्प नहीं है।

सेना में कितनी है महिलाओं की संख्या

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सेना में फिलहाल लगभग 1,561 महिला अधिकारी, वायुसेना में 1,594 अधिकारी और नौसेना में 644 महिला अधिकारी हैं। महिलाओं को सेना की तीनों इकाइयों में सैनिक के तौर पर नहीं, बल्कि केवल अधिकारी के तौर पर शामिल किया जाता है।

 

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