सुप्रीम कोर्ट ने दी पैरेंट्स को राहत, कहा- ऑनलाइन क्लासेस के कारण स्कूल चलाने का खर्च कम हुआ, इसलिए फीस भी घटानी चाहिए

Supreme Court

चैतन्य भारत न्यूज

कोरोना महामारी के चलते पिछले साल से स्कूल बंद है और ऑनलाइन क्लासेस चल रही है। स्कूल लंबे समय से बंद है और पढ़ाई और फीस को लेकर अभिभावक परेशान हैं। अब फीस का मामला देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच गया और अब इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, ‘स्कूल बंद हैं। उन्हें कैंपस में दी जाने वाली कई सुविधाओं का खर्च नहीं उठाना पड़ रहा है। इसलिए संचालन का खर्च कम हो गया है। इसलिए उन्हें ऑनलाइन क्लासेस की फीस जरूर घटानी चाहिए।’

राजस्थान के स्कूलों की अर्जी पर SC में हुई सुनवाई

बता दें राजस्थान के कई स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के उस फैसले के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें स्कूलों को 30% फीस माफ करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की बेंच ने कहा- ‘ऐसा कोई कानून नहीं है, जो राज्य सरकार को ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार देता हो, पर हम भी यह मानते हैं कि स्कूलों को फीस घटानी चाहिए।’

कोर्ट ने आगे कहा, ‘शैक्षणिक संस्थानों के मैनेजमेंट को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। लोग महामारी के चलते परेशानियों का सामना कर रहे हैं। स्कूलों को बच्चों और अभिभावकों को राहत देने वाले कदम उठाने चाहिए।’

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि, ‘कैंपस में स्टूडेंट्स को जो सुविधाएं दी जाती हैं, वो मौजूदा हालात में उन्हें नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में उसके पेमेंट से स्कूलों को फायदा हो रहा है और स्कूलों को निश्चित तौर पर इस फायदे से बचना चाहिए। कानूनन तो स्कूल ऐसी सुविधाओं के लिए स्कूल फीस नहीं ले सकते, जो इन हालात के चलते छात्रों को नहीं मिल पा रही हैं।’

कोर्ट ने कहा कि, ‘ऐसी सुविधाओं के लिए फीस लेना मुनाफा कमाने और व्यवसायीकरण में शामिल होने जैसा ही है। 2020-21 में स्कूल लंबे समय तक कम्पलीट लॉकडाउन के चलते नहीं खुले, ये सभी जानते हैं और कानूनन भी इसे नोटिस में लिया गया है। निश्चित तौर पर स्कूलों ने पेट्रोल-डीजल, बिजली, पानी, मेंटेनेंस और सफाई पर बार-बार होने वाले खर्च बचाए होंगे।’


 

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